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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

बुंदेलखंड के लोकेशन पर दूसरे राज्यो के फिल्म डायरेक्टरों का कब्जा

छतरपुर - बुंदेलखंड के नेताओ का दिमाग सिर्फ बालू में है अगर नहीं तो फिर बुंदेलखंड के कलाकारों पर ध्यान क्यों नहीं हर क्षेत्रीय भाषा का अपना खुद का सेटेलाइट चैनल है जैसे भोजपुरियों के लिए भोजपुरी चेन्नल मराठीओ के लिए मराठी चैनल उड़िया के लिए उड़िया चैनल बंगाली चैनल लेकिन हमारे बुंदेलखंडी प्रतिभा के लिए अपना कोई बुन्देली सेटेलाइट चैनल कई साल बीतने के बाद भी नहीं  आखिर बुन्देली लोग अपना टैलेंट  दिखाए तो दिखाए कहां...?


इसलिए बुंदेलखंड अपनी विरासत को दूसरे अंचलों की तुलना में खोता जा रहा है ! अब जरूरत है तो बुंदेलखंड को देश और दुनिया के पटल पर लाने की पहचान दिलाने के उद्देश्य से यहां के जनप्रतिनिधियों को काम करना होगा

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