छतरपुर जिले के नौगांव में हुआ दर्दनाक हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी पूरी व्यवस्था पर लगा हुआ एक बदनुमा दाग है
क्या छतरपुर में ज़िंदगी की कीमत सिर्फ ₹20 हज़ार रह गई है ? समीर अवस्थी छतरपुर जिले के नौगांव में हुआ दर्दनाक हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था, प्रशासनिक लापरवाही और बेलगाम भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण है। नगर पालिका द्वारा कराए जा रहे तोरण द्वार निर्माण कार्य के दौरान ढांचा गिरने से एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, तीन मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं और मलबे में कई और मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। यह हादसा कई सवाल खड़े करता है और हर सवाल व्यवस्था के मुंह पर एक तमाचा है। सबसे बड़ा और शर्मनाक सवाल यह है कि क्या छतरपुर में एक गरीब मजदूर की ज़िंदगी की कीमत सिर्फ ₹20 हज़ार तय कर दी गई है? हादसे के बाद प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार को दी जाने वाली तात्कालिक सहायता के नाम पर महज़ ₹20 हज़ार की घोषणा करना, जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। क्या इतनी सी राशि से एक परिवार अपने कमाने वाले सदस्य की मौत का दर्द, भविष्य की चिंता और बच्चों की ज़िम्मेदारी उठा सकता है? यह हादसा अचानक नहीं हुआ। बिना सुरक्षा मानकों, बिना तकनीकी जांच, बिना योग्य इंजीनियरों की निगरान...