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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

भरोसे की डोर जीवन का सबसे मजबूत संबंध

जब तक भरोसा है,तब तक उम्मीद ज़िंदा है

जीवन एक अनवरत यात्रा है, जिसमें हर दिन कोई आता है, कोई चला जाता है। कोई हमें मुस्कान देकर जाता है, तो कोई खामोशी का एहसास छोड़ जाता है। इन सबके बीच जो चीज़ हमें भीतर से जोड़कर रखती है, जो हर टूटन के बाद हमें फिर से उठ खड़ा करती है वह है भरोसा

भरोसा केवल इंसान से इंसान के बीच का रिश्ता नहीं, बल्कि यह मनुष्य और जीवन के बीच का अटूट वादा है। जब हम जन्म लेते हैं, तो अनजाने कल पर भरोसा करते हैं। जब हम सपने देखते हैं, तो विश्वास करते हैं कि वे सच होंगे। और जब कोई अपना हमें छोड़ जाता है, तब भी दिल में एक उम्मीद ज़िंदा रहती है कि उसने हमें कुछ सिखाया है, कुछ दिया है, जो हमारे साथ हमेशा रहेगा।

ज़िंदगी का रास्ता कभी आसान नहीं होता। कभी वक्त ठोकर देता है, कभी हालात हमारी परीक्षा लेते हैं। लेकिन जो लोग भरोसे की डोर को मजबूती से थामे रहते हैं, वही आगे बढ़ते हैं। यही डोर हमें टूटने नहीं देती, यही हमें गिरकर फिर उठने की ताकत देती है।

भरोसा एक अदृश्य शक्ति है जो हमें खुद पर, दूसरों पर और ईश्वर पर यक़ीन करना सिखाती है। यह हमें बताती है कि हर अंधेरी रात के बाद सवेरा अवश्य होता है। जब मन हार मानने को होता है, तब यही भरोसा हमें दोबारा खड़ा कर देता है।

इसलिए जब ज़िंदगी मुश्किल लगे, जब राहें धुंधली हो जाएँ, तो बस खुद से कहना 

मैं भरोसे की डोर को नहीं छोड़ूंगा,
क्योंकि जब तक यह डोर मेरे हाथ में है,
तब तक उम्मीद ज़िंदा है।

जीवन में जो लोग आते हैं, वे हमें चलना सिखाते हैं;
जो चले जाते हैं, वे हमें जीना सिखा जाते हैं और जो हमारे साथ रह जाते हैं, वे हमें यह याद दिलाते हैं कि भरोसा ही वह डोर है जो जीवन को जोड़कर रखती है।


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