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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

भरोसे की डोर जीवन का सबसे मजबूत संबंध

जब तक भरोसा है,तब तक उम्मीद ज़िंदा है

जीवन एक अनवरत यात्रा है, जिसमें हर दिन कोई आता है, कोई चला जाता है। कोई हमें मुस्कान देकर जाता है, तो कोई खामोशी का एहसास छोड़ जाता है। इन सबके बीच जो चीज़ हमें भीतर से जोड़कर रखती है, जो हर टूटन के बाद हमें फिर से उठ खड़ा करती है वह है भरोसा

भरोसा केवल इंसान से इंसान के बीच का रिश्ता नहीं, बल्कि यह मनुष्य और जीवन के बीच का अटूट वादा है। जब हम जन्म लेते हैं, तो अनजाने कल पर भरोसा करते हैं। जब हम सपने देखते हैं, तो विश्वास करते हैं कि वे सच होंगे। और जब कोई अपना हमें छोड़ जाता है, तब भी दिल में एक उम्मीद ज़िंदा रहती है कि उसने हमें कुछ सिखाया है, कुछ दिया है, जो हमारे साथ हमेशा रहेगा।

ज़िंदगी का रास्ता कभी आसान नहीं होता। कभी वक्त ठोकर देता है, कभी हालात हमारी परीक्षा लेते हैं। लेकिन जो लोग भरोसे की डोर को मजबूती से थामे रहते हैं, वही आगे बढ़ते हैं। यही डोर हमें टूटने नहीं देती, यही हमें गिरकर फिर उठने की ताकत देती है।

भरोसा एक अदृश्य शक्ति है जो हमें खुद पर, दूसरों पर और ईश्वर पर यक़ीन करना सिखाती है। यह हमें बताती है कि हर अंधेरी रात के बाद सवेरा अवश्य होता है। जब मन हार मानने को होता है, तब यही भरोसा हमें दोबारा खड़ा कर देता है।

इसलिए जब ज़िंदगी मुश्किल लगे, जब राहें धुंधली हो जाएँ, तो बस खुद से कहना 

मैं भरोसे की डोर को नहीं छोड़ूंगा,
क्योंकि जब तक यह डोर मेरे हाथ में है,
तब तक उम्मीद ज़िंदा है।

जीवन में जो लोग आते हैं, वे हमें चलना सिखाते हैं;
जो चले जाते हैं, वे हमें जीना सिखा जाते हैं और जो हमारे साथ रह जाते हैं, वे हमें यह याद दिलाते हैं कि भरोसा ही वह डोर है जो जीवन को जोड़कर रखती है।


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