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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

भरोसे की डोर जीवन का सबसे मजबूत संबंध

जब तक भरोसा है,तब तक उम्मीद ज़िंदा है

जीवन एक अनवरत यात्रा है, जिसमें हर दिन कोई आता है, कोई चला जाता है। कोई हमें मुस्कान देकर जाता है, तो कोई खामोशी का एहसास छोड़ जाता है। इन सबके बीच जो चीज़ हमें भीतर से जोड़कर रखती है, जो हर टूटन के बाद हमें फिर से उठ खड़ा करती है वह है भरोसा

भरोसा केवल इंसान से इंसान के बीच का रिश्ता नहीं, बल्कि यह मनुष्य और जीवन के बीच का अटूट वादा है। जब हम जन्म लेते हैं, तो अनजाने कल पर भरोसा करते हैं। जब हम सपने देखते हैं, तो विश्वास करते हैं कि वे सच होंगे। और जब कोई अपना हमें छोड़ जाता है, तब भी दिल में एक उम्मीद ज़िंदा रहती है कि उसने हमें कुछ सिखाया है, कुछ दिया है, जो हमारे साथ हमेशा रहेगा।

ज़िंदगी का रास्ता कभी आसान नहीं होता। कभी वक्त ठोकर देता है, कभी हालात हमारी परीक्षा लेते हैं। लेकिन जो लोग भरोसे की डोर को मजबूती से थामे रहते हैं, वही आगे बढ़ते हैं। यही डोर हमें टूटने नहीं देती, यही हमें गिरकर फिर उठने की ताकत देती है।

भरोसा एक अदृश्य शक्ति है जो हमें खुद पर, दूसरों पर और ईश्वर पर यक़ीन करना सिखाती है। यह हमें बताती है कि हर अंधेरी रात के बाद सवेरा अवश्य होता है। जब मन हार मानने को होता है, तब यही भरोसा हमें दोबारा खड़ा कर देता है।

इसलिए जब ज़िंदगी मुश्किल लगे, जब राहें धुंधली हो जाएँ, तो बस खुद से कहना 

मैं भरोसे की डोर को नहीं छोड़ूंगा,
क्योंकि जब तक यह डोर मेरे हाथ में है,
तब तक उम्मीद ज़िंदा है।

जीवन में जो लोग आते हैं, वे हमें चलना सिखाते हैं;
जो चले जाते हैं, वे हमें जीना सिखा जाते हैं और जो हमारे साथ रह जाते हैं, वे हमें यह याद दिलाते हैं कि भरोसा ही वह डोर है जो जीवन को जोड़कर रखती है।


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