Skip to main content

BREAKING NEWS

वाह रे नेशनल मीडिया... ABP News

जब देश में किसान आत्महत्या कर रहा हो,बेरोजगार डिग्री लेकर दर-दर भटक रहा हो, गांवों में सड़क, पानी और अस्पताल की हालत बदतर हो,पुलिस थानों में स्टाफ की कमी हो,छोटे शहरों में भ्रष्टाचार चरम पर हो,तब नेशनल मीडिया को सबसे बड़ी चिंता ये है कि कॉन्डम बनाने का कच्चा माल नहीं आ रहा ? वाह रे नेशनल मीडिया... देश में महंगाई से जनता का “दम” निकल रहा है, लेकिन टीवी पर बहस इस बात की चल रही है कि “रबर” कैसे बचेगा। किसान की फसल जल जाए,मजदूर का घर टूट जाए, युवाओं को नौकरी न मिले, गांव में एम्बुलेंस समय पर न पहुंचे, इन खबरों में शायद टीआरपी नहीं है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट युद्ध से कॉन्डम की सप्लाई पर असर पड़ जाए,तो स्टूडियो में ऐसे हंगामा होता है जैसे देश की सीमाएं खतरे में आ गई हों। अब शायद अगली ब्रेकिंग यही होगी.... देश संकट में,रोमांस पर मंडराया खतरा मिडिल ईस्ट युद्ध से रिश्तों में आई मंदी कच्चे माल की कमी से प्यार पर पड़ा असर सवाल यह नहीं कि खबर दिखाई क्यों गई... सवाल यह है कि क्या देश में दिखाने के लिए इससे बड़ा कोई मुद्दा बचा ही नहीं है ? नेशनल मीडिया अब खबर नहीं दिखा रहा,लोगों का ध्यान भ...

छतरपुर में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही पर उठा बवाल, गरीबों को नहीं मिला तैयारी का समय, कलेक्टर ने लगाई अधिकारियों को फटकार

दिवाली से पहले गरीबों पर बुलडोजर: छतरपुर में प्रशासन की अचानक कार्रवाई से मचा हड़कंप


छतरपुर,दिवाली से ठीक पहले छतरपुर नगर में प्रशासन द्वारा की गई अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर बवाल मच गया है। बीते रविवार 5 अक्टूबर को सटई रोड पर एसडीएम और नगर पालिका की टीम ने अचानक बुलडोजर चलवाकर छोटे दुकानदारों की गुमटियां, ठेले और अस्थायी ढांचे तोड़ दिए। इस कार्रवाई को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई की सूचना पहले 6 अक्टूबर सोमवार की दी गई थी, लेकिन अचानक रविवार को ही अवकाश के दिन अतिक्रमण हटाया गया। न तो दुकानदारों को पूरा समय मिला, न ही उन्हें अपने सामान को निकालने का मौका।


जनता का फूटा गुस्सा, सड़कों पर उतरे व्यापारी

कार्रवाई के दौरान गरीब दुकानदारों की रोजी-रोटी छिनते देख लोग सड़क पर उतर आए। विरोध तब और तेज हो गया जब देखा गया कि छोटे दुकानदारों की दुकानें तोड़ी जा रही थीं, लेकिन बड़े और रसूखदार व्यापारियों के अवैध पार्किंग एरिया को हाथ तक नहीं लगाया गया। जनता के विरोध के बाद ही प्रशासन ने एक बड़े होटल के बाहर की अवैध पार्किंग पर बुलडोजर चलाया।


कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने लगाई अधिकारियों की क्लास

घटना पर गंभीर संज्ञान लेते हुए छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कार्रवाई में शामिल अधिकारियों की जमकर फटकार लगाई। बताया जा रहा है कि कलेक्टर ने अधिकारियों को लोकतंत्र और समाजशास्त्र का पाठ पढ़ाते हुए चेताया कि इस तरह की पक्षपातपूर्ण और अमानवीय कार्रवाई प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है।


उठते हैं कई सवाल:

  1. अचानक रविवार को ही कार्रवाई क्यों की गई, जब मुनादी सोमवार 6 अक्टूबर की थी?

  2. क्या गरीब दुकानदारों को जानबूझकर सॉफ्ट टारगेट बनाकर निशाना बनाया गया?

  3. बड़े रसूखदार व्यापारियों को कार्रवाई से क्यों पहले बख्शा गया?

  4. क्या कार्रवाई से पहले सभी को समान रूप से नोटिस और समय दिया गया था?

  5. दिवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार से ठीक पहले यह कार्रवाई क्यों की गई, जब गरीब तबका अपने घरों के लिए खर्च जोड़ रहा था?

सरकार रोज़गार दे रही,प्रशासन छीन रहा

स्थानीय नागरिकों और पीड़ित दुकानदारों ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारें बेरोजगारों के लिए योजनाएं चला रही हैं, स्वरोज़गार को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन छतरपुर प्रशासन की यह कार्रवाई सरकार के उद्देश्यों के विपरीत प्रतीत होती है।
त्योहारी सीजन में जब गरीब अपनी रोज़ी-रोटी जोड़ते हैं, ऐसे समय में दुकानें उजाड़ देना अमानवीय है।

छतरपुर में हुई यह विवादित कार्रवाई न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि नीचे स्तर पर कहीं न कहीं फैसले मनमाने तरीके से लिए जा रहे हैं। आने वाले समय में जनता और प्रशासन के बीच विश्वास की बहाली के लिए पारदर्शिता और संवेदनशीलता बेहद जरूरी है।


Comments