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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

बारात निकलने से पहले शिव के दर पर दस्तक खजुराहो में दूल्हा देव मंदिर की अनोखी परंपरा

खजुराहो का दूल्हा देव मंदिर जहां हर दूल्हा लेता है शिव का विशेष आशीर्वाद
विश्वप्रसिद्ध चंदेलकालीन मंदिरों के बीच एक ऐसा अद्भुत और रहस्यमयी धाम स्थित है, जिसे दूल्हा देव मंदिर के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव विशेष रूप में स्वयं उपस्थित होकर दूल्हों को आशीर्वाद देते हैं। 
स्थानीय मान्यता के अनुसार बिना इस मंदिर में दर्शन किए कोई भी बारात शुभ नहीं मानी जाती। सदियों पुराने इस शिवालय की नक्काशी इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्ता की प्रतीक है। मंदिर की दीवारों पर उकेरे गए अद्भुत शिल्प इसकी सांस्कृतिक विरासत को और अधिक जीवंत बनाते हैं। गर्भगृह में स्थित शिवलिंग के दर्शन के लिए प्रतिदिन भक्तों का तांता लगा रहता है।
लोक परंपरा कहती है कि बारात लेकर निकलने से पहले दूल्हा यहां पहुंचकर भगवान शिव से आशीर्वाद लेता है। मान्यता है कि दूल्हा देव के आशीर्वाद से वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। लोगों का विश्वास है कि इस शिवलिंग की एक परिक्रमा करने से हजार परिक्रमाओं के बराबर पुण्य फल मिलता है।
आस्था और परंपरा के इस अद्भुत संगम ने दूल्हा देव मंदिर को खजुराहो की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर में विशेष स्थान प्रदान किया है। आज भी यहां विश्वास और भक्ति की वही भावना जीवंत है, जिसने इस मंदिर को लोक श्रद्धा का केंद्र बना दिया है।

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