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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

बारात निकलने से पहले शिव के दर पर दस्तक खजुराहो में दूल्हा देव मंदिर की अनोखी परंपरा

खजुराहो का दूल्हा देव मंदिर जहां हर दूल्हा लेता है शिव का विशेष आशीर्वाद
विश्वप्रसिद्ध चंदेलकालीन मंदिरों के बीच एक ऐसा अद्भुत और रहस्यमयी धाम स्थित है, जिसे दूल्हा देव मंदिर के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव विशेष रूप में स्वयं उपस्थित होकर दूल्हों को आशीर्वाद देते हैं। 
स्थानीय मान्यता के अनुसार बिना इस मंदिर में दर्शन किए कोई भी बारात शुभ नहीं मानी जाती। सदियों पुराने इस शिवालय की नक्काशी इसकी भव्यता और ऐतिहासिक महत्ता की प्रतीक है। मंदिर की दीवारों पर उकेरे गए अद्भुत शिल्प इसकी सांस्कृतिक विरासत को और अधिक जीवंत बनाते हैं। गर्भगृह में स्थित शिवलिंग के दर्शन के लिए प्रतिदिन भक्तों का तांता लगा रहता है।
लोक परंपरा कहती है कि बारात लेकर निकलने से पहले दूल्हा यहां पहुंचकर भगवान शिव से आशीर्वाद लेता है। मान्यता है कि दूल्हा देव के आशीर्वाद से वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। लोगों का विश्वास है कि इस शिवलिंग की एक परिक्रमा करने से हजार परिक्रमाओं के बराबर पुण्य फल मिलता है।
आस्था और परंपरा के इस अद्भुत संगम ने दूल्हा देव मंदिर को खजुराहो की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर में विशेष स्थान प्रदान किया है। आज भी यहां विश्वास और भक्ति की वही भावना जीवंत है, जिसने इस मंदिर को लोक श्रद्धा का केंद्र बना दिया है।

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