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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

बीड़ी श्रमिकों को फिर से मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ने की तैयारी में मध्यप्रदेश सरकार

मध्यप्रदेश के बीड़ी श्रमिकों को मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ने की तैयारी तेज
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एमएसएमई और इंडस्ट्रीज विभाग की समीक्षा बैठक में तेंदूपत्ता और बीड़ी उद्योग से जुड़े श्रमिकों की आजीविका को पुनर्जीवित करने के लिए व्यापक कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश का तेंदूपत्ता बड़ी मात्रा में पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है, जहाँ बीड़ी उद्योग फल-फूल रहा है, जबकि मध्यप्रदेश के हजारों बीड़ी श्रमिक रोजगार से दूर होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता राज्य की संपत्ति है और इससे मिलने वाला रोजगार भी प्रदेशवासियों को ही मिलना चाहिए। इसके लिए वन विभाग के साथ समन्वय कर ठोस समाधान तैयार करने के निर्देश दिए गए।

सरकार का लक्ष्य बीड़ी बनाने वाले परिवारों को लगातार और बेहतर काम उपलब्ध कराना, महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार को प्राथमिकता देना तथा मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा में सुधार करना है। राज्य सरकार का प्रयास है कि तेंदूपत्ता आधारित बीड़ी उद्योग से जुड़े हर परिवार को सम्मानजनक और स्थायी आय प्राप्त हो सके।

बैठक में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग की उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण भी किया गया। विभाग ने बताया कि जीआईएस आरआईसी के माध्यम से 12.70 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। पिछले दो वर्षों में 327 एमएसएमई और बड़ी इकाइयों में उत्पादन प्रारंभ हुआ, जिससे 40,516 रोजगार सृजित हुए। उद्योगों को 4,977 करोड़ रुपये की सहायता और सुविधाएँ वितरित की गईं।

निवेश आकर्षण के क्षेत्र में 2.48 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को भूमि आवंटित की गई है, जिससे 2.85 लाख रोजगार संभावित हैं। 229 इकाइयों का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। 18,685 करोड़ रुपये के 43 प्रोजेक्ट्स को कस्टमाइज्ड पैकेज स्वीकृत किया गया है, जिनसे 21,835 रोजगार की संभावना है।

औद्योगिक अधोसंरचना विकास के तहत 26 नए औद्योगिक पार्क और क्लस्टरों को मंजूरी दी गई है। पीएम मित्रा पार्क के लिए 873 हेक्टेयर भूमि स्वीकृत की गई है। मोहासा बाबई आरई पार्क के प्रथम चरण में 884 एकड़ और द्वितीय चरण में 750 एकड़ भूमि को स्वीकृति मिली है। 33 औद्योगिक क्षेत्रों के उन्नयन के लिए 536 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। महिलाओं के लिए 4 वर्किंग वुमन हॉस्टल भी स्वीकृत किए गए हैं।

निवेश प्रोत्साहन के क्षेत्र में जीआईएस 2025 का सफल आयोजन किया गया। प्रदेश ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 72 निवेश कार्यक्रम और 23 संवाद सत्र आयोजित किए। उद्योग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात की तीन नई नीतियाँ लागू की गई हैं। निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए इन्वेस्ट पोर्टल, फेसलेस नो क्वेरी प्रोत्साहन प्रणाली और जीआईएस आधारित ऑनलाइन भूमि आवंटन सुविधा शुरू की गई है।

संस्थागत सुधारों के तहत पांच नए क्षेत्रीय कार्यालयों और कोयंबटूर में व्यापार विस्तार कार्यालय की स्थापना की गई है। सभी जिला कलेक्टर कार्यालयों में निवेश केंद्र बनाए गए हैं। महिलाओं के लिए नाइट शिफ्ट में कार्य की अनुमति भी दी गई है।

खजुराहो स्थित महाराजा छत्रसाल कन्वेंशन सेंटर में हुई इस बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की। बैठक में विभागीय नीतियों, योजनाओं और भविष्य की औद्योगिक रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई।

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