Skip to main content

BREAKING NEWS

क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

सवालों के घेरे में CMHO छतरपुर के सैकड़ों कर्मचारियों का वेतन अटका अब साहब मांग रहे 20 दिन का समय

सवालों के घेरे में CMHO छतरपुर के सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं

छतरपुर : जिले के स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ सैकड़ों आउटसोर्स कर्मचारियों की ज़िंदगी प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती नज़र आ रही है। कई महीनों से वेतन न मिलने से कर्मचारियों के सामने परिवार चलाने का संकट खड़ा हो गया है। शिकायतों के बावजूद न तो एजेंसी पर कार्रवाई हुई और न ही कर्मचारियों के खाते में वेतन पहुँचा जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आर.पी. गुप्ता की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने बार-बार संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

कलेक्टर ने दिया था आदेश,कार्रवाई फिर भी नहीं

जानकारी के मुताबिक 17 मार्च 2025 को तत्कालीन कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिस एजेंसी ने कर्मचारियों का वेतन रोका है, उसका अनुबंध तत्काल निरस्त किया जाए। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो अनुबंध रद्द हुआ और न ही एजेंसी पर कोई कार्रवाई की गई।

सवाल यह है कि कलेक्टर के आदेश के बाद भी यह फ़ाइल किस मेज़ पर अटक गई?

CMHO की सफाई से और बढ़े सवाल

मामला जब मीडिया में पहुंचा तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी आर.पी. गुप्ता ने कहा कि उन्हें कलेक्टर के आदेश की जानकारी नहीं है और कई “तकनीकी कारणों” से देरी हो रही है। हालाँकि इससे पहले वही अधिकारी एजेंसी को लापरवाही पर नोटिस जारी कर चुके हैं अब सवाल उठ रहा है 

➡️ अगर अधिकारी को आदेश की जानकारी नहीं थी, तो नोटिस कैसे जारी हुआ ?

➡️ और अगर जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

कर्मचारी बोले साहब सुनते हैं,करते कुछ नहीं

वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारियों ने मंगलवार को जनसुनवाई में एक बार फिर अपनी आपबीती सुनाई। कर्मचारियों ने कहा,

“हम महीनों से काम कर रहे हैं, लेकिन पैसे नहीं मिले। परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। हर बार कहा जाता है कि जांच चल रही है, लेकिन नतीजा शून्य है।”

20 दिन की मोहलत, उम्मीदों का सहारा

मीडिया में मामला उजागर होने के बाद अब कर्मचारियों की समस्याओं को दूर करने के लिए 20 दिन का समय दिया गया है। हालाँकि,कर्मचारियों में यह आशंका है कि यह वादा भी पहले की तरह काग़ज़ों तक ही सीमित न रह जाए।

सरकार की साख पर भी सवाल

यह मामला अब सिर्फ वेतन का नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम की जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। अब देखना होगा कि मध्य प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग इस लापरवाही पर क्या कदम उठाते हैं 
क्या छतरपुर के इन कर्मचारियों को उनका हक़ मिलेगा या एक बार फिर फ़ाइलों की धूल में दब जाएगा यह मामला?


Comments