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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

मध्य प्रदेश में 6 साल की मासूम से दुष्कर्म आरोपी सलमान पकड़ा गया



6 साल की मासूम से दुष्कर्म आरोपी सलमान पकड़ा गया,पूरा प्रदेश बोला फांसी दो, फांसी दो


फांसी ही एकमात्र जवाब है मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गौहरगंज में छह साल की एक मासूम बच्ची के साथ जो हैवानियत हुई, उसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। आरोपी का नाम है सलमान खान। उम्र महज पच्चीस साल। लेकिन इस उम्र में उसने जो किया, वह किसी इंसान का काम नहीं बल्कि राक्षस है

छह साल की बच्ची जो अभी दुनिया को समझना भी शुरू नहीं कर पाई थी,जिसके सपने अभी रंग-बिरंगे गुब्बारों तक सीमित थी,उसके साथ दुष्कर्म की घटना ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया 

लेकिन इस बार प्रदेश की जनता चुप नहीं रही।
हर गली, हर मोहल्ले, हर चौराहे पर एक ही आवाज़ गूँजी,पकड़ो उसे… फांसी दो उसे और फिर चमत्कार हुआ भोपाल के गांधीनगर में कुछ मुस्लिम युवकों ने सलमान को पहचाना उन्होंने धर्म नहीं देखा, इंसानियत देखी। उन्होंने उसे पकड़ा, पीटा नहीं, कानून के हवाले किया यह वही भोपाल था जहाँ कुछ लोग धर्म के नाम पर बाँटने की कोशिश करते हैं 

पुलिस आरोपी सलमान को लेकर जा रही थी। रास्ते में सलमान ने भागने की कोशिश की। पुलिस ने पैर में गोली मारी अब वह हमीदिया अस्पताल में है। लेकिन उसका इलाज करने वाला हर हाथ काँप रहा है। हर नर्स, हर डॉक्टर के मन में एक ही सवाल, हम इसे बचाएँ क्यों? अब सवाल सिर्फ सजा का नहीं है। सवाल समय का है। सवाल इरादे का है।

हमारे पास POCSO एक्ट है। फांसी का प्रावधान है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं। फिर भी निर्भया को इंसाफ़ मिलने में सालों लग गए। 

इस बार मध्य प्रदेश ने ठान लिया है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा,जमीन में छिपे या आसमान में उड़े, ढूँढ निकालेंगे। खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा,
ऐसे दरिंदों को यहाँ जीने का हक नहीं।

लेकिन नेताओं के बयान से ज्यादा ताकत इस बार जनता में है। जनता जो सड़कों पर है,जो सोशल मीडिया पर है,जो चुप नहीं बैठेगी।यह सिर्फ़ सलमान खान की फांसी की लड़ाई नहीं है। यह उस व्यवस्था की लड़ाई है जो हर बार अपराधी को बचाने के रास्ते ढूँढती है।

यह उस मानसिकता की लड़ाई है जो बलात्कारी को मानसिक रूप से बीमार” बताकर बचाने की कोशिश करती है। 
इस बार नहीं इस बार बच्ची की चीख पूरे प्रदेश की चीख बन गई है। इस बार फांसी ही एकमात्र जवाब है। और अगर यह फांसी नहीं हुई,तो समझिए कि हम सब मिलकर उस मासूम को एक बार फिर मार देंगे।
आरोपी सलमान खान को फांसी मिलनी चाहिए 

और उस मासूम बेटी के लिए,जो अभी अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच लड़ रही है,बस एक ही प्रार्थना,हे भगवान, इसे जीवन देना। और उसके बलात्कारी को,फांसी बस फांसी।


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