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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

मध्य प्रदेश में 6 साल की मासूम से दुष्कर्म आरोपी सलमान पकड़ा गया



6 साल की मासूम से दुष्कर्म आरोपी सलमान पकड़ा गया,पूरा प्रदेश बोला फांसी दो, फांसी दो


फांसी ही एकमात्र जवाब है मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गौहरगंज में छह साल की एक मासूम बच्ची के साथ जो हैवानियत हुई, उसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। आरोपी का नाम है सलमान खान। उम्र महज पच्चीस साल। लेकिन इस उम्र में उसने जो किया, वह किसी इंसान का काम नहीं बल्कि राक्षस है

छह साल की बच्ची जो अभी दुनिया को समझना भी शुरू नहीं कर पाई थी,जिसके सपने अभी रंग-बिरंगे गुब्बारों तक सीमित थी,उसके साथ दुष्कर्म की घटना ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया 

लेकिन इस बार प्रदेश की जनता चुप नहीं रही।
हर गली, हर मोहल्ले, हर चौराहे पर एक ही आवाज़ गूँजी,पकड़ो उसे… फांसी दो उसे और फिर चमत्कार हुआ भोपाल के गांधीनगर में कुछ मुस्लिम युवकों ने सलमान को पहचाना उन्होंने धर्म नहीं देखा, इंसानियत देखी। उन्होंने उसे पकड़ा, पीटा नहीं, कानून के हवाले किया यह वही भोपाल था जहाँ कुछ लोग धर्म के नाम पर बाँटने की कोशिश करते हैं 

पुलिस आरोपी सलमान को लेकर जा रही थी। रास्ते में सलमान ने भागने की कोशिश की। पुलिस ने पैर में गोली मारी अब वह हमीदिया अस्पताल में है। लेकिन उसका इलाज करने वाला हर हाथ काँप रहा है। हर नर्स, हर डॉक्टर के मन में एक ही सवाल, हम इसे बचाएँ क्यों? अब सवाल सिर्फ सजा का नहीं है। सवाल समय का है। सवाल इरादे का है।

हमारे पास POCSO एक्ट है। फांसी का प्रावधान है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं। फिर भी निर्भया को इंसाफ़ मिलने में सालों लग गए। 

इस बार मध्य प्रदेश ने ठान लिया है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा,जमीन में छिपे या आसमान में उड़े, ढूँढ निकालेंगे। खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा,
ऐसे दरिंदों को यहाँ जीने का हक नहीं।

लेकिन नेताओं के बयान से ज्यादा ताकत इस बार जनता में है। जनता जो सड़कों पर है,जो सोशल मीडिया पर है,जो चुप नहीं बैठेगी।यह सिर्फ़ सलमान खान की फांसी की लड़ाई नहीं है। यह उस व्यवस्था की लड़ाई है जो हर बार अपराधी को बचाने के रास्ते ढूँढती है।

यह उस मानसिकता की लड़ाई है जो बलात्कारी को मानसिक रूप से बीमार” बताकर बचाने की कोशिश करती है। 
इस बार नहीं इस बार बच्ची की चीख पूरे प्रदेश की चीख बन गई है। इस बार फांसी ही एकमात्र जवाब है। और अगर यह फांसी नहीं हुई,तो समझिए कि हम सब मिलकर उस मासूम को एक बार फिर मार देंगे।
आरोपी सलमान खान को फांसी मिलनी चाहिए 

और उस मासूम बेटी के लिए,जो अभी अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच लड़ रही है,बस एक ही प्रार्थना,हे भगवान, इसे जीवन देना। और उसके बलात्कारी को,फांसी बस फांसी।


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