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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

मध्य प्रदेश में 6 साल की मासूम से दुष्कर्म आरोपी सलमान पकड़ा गया



6 साल की मासूम से दुष्कर्म आरोपी सलमान पकड़ा गया,पूरा प्रदेश बोला फांसी दो, फांसी दो


फांसी ही एकमात्र जवाब है मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गौहरगंज में छह साल की एक मासूम बच्ची के साथ जो हैवानियत हुई, उसने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है। आरोपी का नाम है सलमान खान। उम्र महज पच्चीस साल। लेकिन इस उम्र में उसने जो किया, वह किसी इंसान का काम नहीं बल्कि राक्षस है

छह साल की बच्ची जो अभी दुनिया को समझना भी शुरू नहीं कर पाई थी,जिसके सपने अभी रंग-बिरंगे गुब्बारों तक सीमित थी,उसके साथ दुष्कर्म की घटना ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया 

लेकिन इस बार प्रदेश की जनता चुप नहीं रही।
हर गली, हर मोहल्ले, हर चौराहे पर एक ही आवाज़ गूँजी,पकड़ो उसे… फांसी दो उसे और फिर चमत्कार हुआ भोपाल के गांधीनगर में कुछ मुस्लिम युवकों ने सलमान को पहचाना उन्होंने धर्म नहीं देखा, इंसानियत देखी। उन्होंने उसे पकड़ा, पीटा नहीं, कानून के हवाले किया यह वही भोपाल था जहाँ कुछ लोग धर्म के नाम पर बाँटने की कोशिश करते हैं 

पुलिस आरोपी सलमान को लेकर जा रही थी। रास्ते में सलमान ने भागने की कोशिश की। पुलिस ने पैर में गोली मारी अब वह हमीदिया अस्पताल में है। लेकिन उसका इलाज करने वाला हर हाथ काँप रहा है। हर नर्स, हर डॉक्टर के मन में एक ही सवाल, हम इसे बचाएँ क्यों? अब सवाल सिर्फ सजा का नहीं है। सवाल समय का है। सवाल इरादे का है।

हमारे पास POCSO एक्ट है। फांसी का प्रावधान है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं। फिर भी निर्भया को इंसाफ़ मिलने में सालों लग गए। 

इस बार मध्य प्रदेश ने ठान लिया है। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा,जमीन में छिपे या आसमान में उड़े, ढूँढ निकालेंगे। खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा,
ऐसे दरिंदों को यहाँ जीने का हक नहीं।

लेकिन नेताओं के बयान से ज्यादा ताकत इस बार जनता में है। जनता जो सड़कों पर है,जो सोशल मीडिया पर है,जो चुप नहीं बैठेगी।यह सिर्फ़ सलमान खान की फांसी की लड़ाई नहीं है। यह उस व्यवस्था की लड़ाई है जो हर बार अपराधी को बचाने के रास्ते ढूँढती है।

यह उस मानसिकता की लड़ाई है जो बलात्कारी को मानसिक रूप से बीमार” बताकर बचाने की कोशिश करती है। 
इस बार नहीं इस बार बच्ची की चीख पूरे प्रदेश की चीख बन गई है। इस बार फांसी ही एकमात्र जवाब है। और अगर यह फांसी नहीं हुई,तो समझिए कि हम सब मिलकर उस मासूम को एक बार फिर मार देंगे।
आरोपी सलमान खान को फांसी मिलनी चाहिए 

और उस मासूम बेटी के लिए,जो अभी अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच लड़ रही है,बस एक ही प्रार्थना,हे भगवान, इसे जीवन देना। और उसके बलात्कारी को,फांसी बस फांसी।


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