BREAKING NEWS
- Get link
- X
- Other Apps
छतरपुर जिले के नौगांव में हुआ दर्दनाक हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी पूरी व्यवस्था पर लगा हुआ एक बदनुमा दाग है
क्या छतरपुर में ज़िंदगी की कीमत सिर्फ ₹20 हज़ार रह गई है ?
समीर अवस्थी
छतरपुर जिले के नौगांव में हुआ दर्दनाक हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारी व्यवस्था, प्रशासनिक लापरवाही और बेलगाम भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण है। नगर पालिका द्वारा कराए जा रहे तोरण द्वार निर्माण कार्य के दौरान ढांचा गिरने से एक मजदूर की मौके पर ही मौत हो गई, तीन मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं और मलबे में कई और मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। यह हादसा कई सवाल खड़े करता है और हर सवाल व्यवस्था के मुंह पर एक तमाचा है।
सबसे बड़ा और शर्मनाक सवाल यह है कि क्या छतरपुर में एक गरीब मजदूर की ज़िंदगी की कीमत सिर्फ ₹20 हज़ार तय कर दी गई है? हादसे के बाद प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवार को दी जाने वाली तात्कालिक सहायता के नाम पर महज़ ₹20 हज़ार की घोषणा करना, जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। क्या इतनी सी राशि से एक परिवार अपने कमाने वाले सदस्य की मौत का दर्द, भविष्य की चिंता और बच्चों की ज़िम्मेदारी उठा सकता है?
यह हादसा अचानक नहीं हुआ। बिना सुरक्षा मानकों, बिना तकनीकी जांच, बिना योग्य इंजीनियरों की निगरानी के निर्माण कार्य कराना आम बात हो गई है। सवाल यह है कि जब तोरण द्वार जैसे सार्वजनिक निर्माण हो रहे थे, तब सुरक्षा उपकरण क्यों नहीं थे? मजदूरों के लिए हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट, और अन्य जरूरी इंतज़ाम क्यों नहीं किए गए? क्या गुणवत्ता की जांच हुई थी? या फिर ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी जेब भरने के लिए मजदूरों की जान दांव पर लगा दी?
नगर पालिका, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सिर्फ मुआवज़े की औपचारिक घोषणा कर देने से प्रशासन अपने कर्तव्यों से मुक्त नहीं हो सकता। यह सीधा-सीधा आपराधिक लापरवाही का मामला है। जिन लोगों ने घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल किया, जिन्होंने सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज किया, और जिन्होंने आंखें मूंदकर काम चलाया उन सब पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
आज सवाल सिर्फ एक मजदूर की मौत का नहीं है, सवाल उस सोच का है जिसमें गरीब की जान सस्ती और भ्रष्टाचार की कीमत महंगी हो गई है। अगर इस हादसे के बाद भी दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो यह तय है कि कल फिर किसी और निर्माण स्थल पर किसी और गरीब की जान जाएगी, और प्रशासन फिर कुछ हजार रुपये का चेक पकड़ाकर अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ लेगा।
अब वक्त आ गया है कि छतरपुर की जनता सवाल पूछे
आखिर कब तक लापरवाही और भ्रष्टाचार की बलि चढ़ती रहेंगी गरीबों की ज़िंदगियां ? और कब तय होगी उन लोगों की जवाबदेही, जो कुर्सियों पर बैठकर मौत के सौदे कर रहे हैं?
समीर अवस्थी
- Get link
- X
- Other Apps
Trending NEWS
पहली को छोड़ा,दूसरी को जोड़ा अब लड़की के परिजनों ने जोड़ तोड़ कर दी हड्डियाँ बमीठा के पथरगुवा निवासी सोनू अवस्थी की जमकर हुई पिटाई !
- Get link
- X
- Other Apps
डिजिटल इंडिया या डिजिटल डर ? गांवों में रात के पहरे का सच ? खजुराहो एयरपोर्ट निदेशक का चौंकाने वाला बयान...
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment