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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...
बकस्वाहा जंगल से पेड़ ना काटा जाए इसके लिए कई आंदोलन धरना प्रदर्शन सत्याग्रह चलाए जा रहे हैं जबकि खबर यह है अभी तक पर्यावरण स्वीकृति नहीं दी गई ऐसे में उनकी मांग कहां तक जायज है अगर बकस्वाहा में हीरे निकालने के लिए लाखो पेड़ों को काटने की सरकार पर्यावरण स्वीकृति देती है तब यह आंदोलन और मांग पर मैं पूर्ण रुप से समर्थन करूंगा फिलहाल मुझे यह सिर्फ लोगो को फोकस में आने की कहानी समझ में आ रहा है झांसी से खजुराहो फॉर लाइन निर्माण के दौरान भी पेड़ों को ना काटने के लिए कई आंदोलन किए गए  थे लेकिन विचार करिए और बताइए कितने पेड़ बचा पाए बकस्वाहा जंगल में पेड़ों को काटने की अभी तक पर्यावरण स्वीकृति नहीं है कंपनी के पास फिर कैसे पेड़ काटेंगे बिना स्वीकृति के कंपनी की इतनी हिम्मत नहीं की ऑक्सीजन देने वाले लाखों पेड़ों को काटे और अगर सरकार पर्यावरण स्वीकृति कंपनी को डेट देती है फिर किसी में हिम्मत नहीं कि पेड़ों को कटने से बचा सके जैसा झांसी खजुराहो फोर लाइन निर्माण के दौरान देखने को मिला है ! 

मेरा उद्देश्य किसी के मन को ठेस पहुंचाना नहीं है आप लोगों का कहना सही है कि पेड़ काटने से ऑक्सीजन मैं कमी होगी लेकिन यह दूसरा पहलू भी देखिए सरकार ने अभी तक पर्यावरण स्वीकृति नहीं दी अगर पर्यावरण सुकृति कंपनी को मिल जाए और कंपनी के द्वारा पेड़ों को काटना शुरू कर दिया जाए तब यह मांग जायज है चिपको आंदोलन भी जायज है 

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