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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

सरकारी चुप्पी ने मार डाला भरोसा… इंसाफ कब ? छतरपुर में तेज रफ्तार ने उजाड़ा परिवार

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत के बाद भी महिला बाल विकास विभाग की चुप्पी, परिजनों का आरोप – आरोपी खुलेआम घूम रहा !

छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र में रविवार की देर  रात एक भीषण सड़क हादसा हुआ, जिसने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया। गुलगंज से तेहरवीं से लौट रहे दंपति को एनएच-39 पर तेज रफ्तार अल्ट्रो कार ने टक्कर मार दी। हादसा रात 12 से 1 बजे के बीच खैरी टोल प्लाजा के पास हुआ।

बाइक सवार राजाराम अहिरवार और उनकी पत्नी पार्वती अहिरवार सड़क पर लहूलुहान पड़े मिले। जिला अस्पताल से ग्वालियर रेफर किया गया लेकिन रास्ते में पार्वती की मौत हो गई।

🚨 कार चालक पर गंभीर आरोप

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार चालक नशे में धुत था। हादसे के बाद उसने गैरजिम्मेदाराना बयान देते हुए कहा – कोई मरता है तो मर जाए, मुझे क्या!

कार का नंबर MP16 ZC 3527 है, लेकिन अब तक आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

🚔 पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

परिजनों का कहना है कि उन्होंने बमीठा थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस अब तक आरोपी को पकड़ने में नाकाम रही है।

सवाल ये उठता है कि क्या पुलिस इंतज़ार कर रही है कि मीडिया में मामला गर्म हो, तभी गिरफ्तारी होगी ?
या फिर आरोपी पर किसी राजनीतिक संरक्षण है, इसलिए उसे ‘समय’ दिया जा रहा है भागने का?

👩‍👧 महिला बाल विकास विभाग बना तमाशबीन

मृतका पार्वती अहिरवार गंगवाहा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर कार्यरत थीं। हादसे को 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग का कोई भी अधिकारी पीड़ित परिवार के घर तक नहीं पहुंचा।

बड़ा सवाल – क्या एक सरकारी कर्मचारी की मौत पर विभाग की कोई संवेदनशीलता नहीं ? क्या सिर्फ फॉर्म भरवाने और मीटिंग कराने तक सीमित है विभाग ?

परिजनों और ग्रामीणों का साफ आरोप है कि विभागीय अधिकारी केवल ‘कागज़ों की फाइलें’ देखकर चलते हैं, जमीन पर हालात देखने की फुर्सत नहीं।

बच्चों की गुहार – हमें इंसाफ चाहिए

पार्वती अहिरवार के छोटे-छोटे बच्चे मां की तस्वीर को देखकर रो रहे हैं। वे सरकार से पूछ रहे हैं 

क्या हमारी मां की जान की कोई कीमत नहीं ?
हमें किस गुनाह की सजा मिल रही है?

📌 परिजनों की मांगें

आरोपी को तत्काल गिरफ्तार किया जाए
पार्वती के बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी सरकार उठाए महिला बाल विकास विभाग पारिवारिक सहायता दे सरकारी कर्मचारी की मौत पर विभागीय मुआवज़ा घोषित हो

एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की चिता जल चुकी है,
पुलिस और महिला बाल विकास विभाग की चुप्पी – उसके सपनों की राख में बदल चुकी है।अब देखना ये है कि – क्या सरकार सिर्फ condolence message भेजेगी या कुछ ठोस कदम भी उठाएगी?

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