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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

विकास की रफ्तार में रौंदा गया किसान क्या किसान की ज़मीन पर बुलडोजर चलाना ही “प्रगति” है ?

6 महीने से खाली है खजुराहो SDOP की कुर्सी – क्या कोई खास मंजूरी बाकी है ?

प्रशासन की उपेक्षा से उपजा आक्रोश जनता ने उठाई सुरक्षा की मांग धार्मिक धरोहर को पर्यटन से जोड़ने की मांग

युद्ध से पहले जहां गूंजता था हर हर महादेव,वो है प्राचीन स्वर्गेश्वर धाम जहां आल्हा-ऊदल भी जल अर्पित करने आते थे।

हमारा उद्देश्य सिर्फ इतना है — स्वर्गेश्वर धाम की देखरेख हो,विकास हो और यह सनातन संस्कृति के गौरव के रूप में विश्वभर में पहचाना जाए