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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

प्रशासन की उपेक्षा से उपजा आक्रोश जनता ने उठाई सुरक्षा की मांग धार्मिक धरोहर को पर्यटन से जोड़ने की मांग


स्वर्गेश्वर धाम, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित एक प्राचीन और पवित्र स्थल है, जो पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर के पास स्थित है। यह धाम भगवान शिव को समर्पित है और स्थानीय आस्था का केंद्र माना जाता है।

26 मई को पदयात्रा का आयोजन

सोमवती अमावस्या (26 मई 2025) के अवसर पर स्वर्गेश्वर धाम की सुरक्षा और संरक्षण के समर्थन में एक विशेष पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा छतरपुर जिले के टोरिया स्थित श्रीराम मंदिर से सुबह 8 बजे प्रारंभ होगी और स्वर्गेश्वर धाम तक जाएगी। इस आयोजन का उद्देश्य धाम की उपेक्षा के खिलाफ जनजागरण और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है। 

धाम में चोरी की घटना

हाल ही में स्वर्गेश्वर धाम में चोरी की एक घटना सामने आई है, जिसमें मंदिर परिसर से घंटे चुरा लिए गए। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही की आलोचना हो रही है। 

प्रशासनिक उपेक्षा और संरक्षण की मांग

स्वर्गेश्वर धाम की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के बावजूद, यह स्थल प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी इस संबंध में पत्र लिखा गया है। 

पर्यटन से जोड़ने की पहल

धाम को पर्यटन से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि स्वर्गेश्वर धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्रीय धरोहर भी है। इसलिए इसे संरक्षित कर पर्यटन मानचित्र पर लाना आवश्यक है। 

यदि आप 26 मई को होने वाली पदयात्रा में भाग लेने या स्वर्गेश्वर धाम के संरक्षण में सहयोग करना चाहते हैं, तो स्थानीय आयोजकों से संपर्क कर सकते हैं। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

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