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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

प्रशासन की उपेक्षा से उपजा आक्रोश जनता ने उठाई सुरक्षा की मांग धार्मिक धरोहर को पर्यटन से जोड़ने की मांग


स्वर्गेश्वर धाम, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित एक प्राचीन और पवित्र स्थल है, जो पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर के पास स्थित है। यह धाम भगवान शिव को समर्पित है और स्थानीय आस्था का केंद्र माना जाता है।

26 मई को पदयात्रा का आयोजन

सोमवती अमावस्या (26 मई 2025) के अवसर पर स्वर्गेश्वर धाम की सुरक्षा और संरक्षण के समर्थन में एक विशेष पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा छतरपुर जिले के टोरिया स्थित श्रीराम मंदिर से सुबह 8 बजे प्रारंभ होगी और स्वर्गेश्वर धाम तक जाएगी। इस आयोजन का उद्देश्य धाम की उपेक्षा के खिलाफ जनजागरण और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है। 

धाम में चोरी की घटना

हाल ही में स्वर्गेश्वर धाम में चोरी की एक घटना सामने आई है, जिसमें मंदिर परिसर से घंटे चुरा लिए गए। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही की आलोचना हो रही है। 

प्रशासनिक उपेक्षा और संरक्षण की मांग

स्वर्गेश्वर धाम की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के बावजूद, यह स्थल प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी इस संबंध में पत्र लिखा गया है। 

पर्यटन से जोड़ने की पहल

धाम को पर्यटन से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि स्वर्गेश्वर धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्रीय धरोहर भी है। इसलिए इसे संरक्षित कर पर्यटन मानचित्र पर लाना आवश्यक है। 

यदि आप 26 मई को होने वाली पदयात्रा में भाग लेने या स्वर्गेश्वर धाम के संरक्षण में सहयोग करना चाहते हैं, तो स्थानीय आयोजकों से संपर्क कर सकते हैं। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

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