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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

प्रशासन की उपेक्षा से उपजा आक्रोश जनता ने उठाई सुरक्षा की मांग धार्मिक धरोहर को पर्यटन से जोड़ने की मांग


स्वर्गेश्वर धाम, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित एक प्राचीन और पवित्र स्थल है, जो पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर के पास स्थित है। यह धाम भगवान शिव को समर्पित है और स्थानीय आस्था का केंद्र माना जाता है।

26 मई को पदयात्रा का आयोजन

सोमवती अमावस्या (26 मई 2025) के अवसर पर स्वर्गेश्वर धाम की सुरक्षा और संरक्षण के समर्थन में एक विशेष पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा छतरपुर जिले के टोरिया स्थित श्रीराम मंदिर से सुबह 8 बजे प्रारंभ होगी और स्वर्गेश्वर धाम तक जाएगी। इस आयोजन का उद्देश्य धाम की उपेक्षा के खिलाफ जनजागरण और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है। 

धाम में चोरी की घटना

हाल ही में स्वर्गेश्वर धाम में चोरी की एक घटना सामने आई है, जिसमें मंदिर परिसर से घंटे चुरा लिए गए। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही की आलोचना हो रही है। 

प्रशासनिक उपेक्षा और संरक्षण की मांग

स्वर्गेश्वर धाम की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के बावजूद, यह स्थल प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी इस संबंध में पत्र लिखा गया है। 

पर्यटन से जोड़ने की पहल

धाम को पर्यटन से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि स्वर्गेश्वर धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्रीय धरोहर भी है। इसलिए इसे संरक्षित कर पर्यटन मानचित्र पर लाना आवश्यक है। 

यदि आप 26 मई को होने वाली पदयात्रा में भाग लेने या स्वर्गेश्वर धाम के संरक्षण में सहयोग करना चाहते हैं, तो स्थानीय आयोजकों से संपर्क कर सकते हैं। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

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