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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

प्रशासन की उपेक्षा से उपजा आक्रोश जनता ने उठाई सुरक्षा की मांग धार्मिक धरोहर को पर्यटन से जोड़ने की मांग


स्वर्गेश्वर धाम, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित एक प्राचीन और पवित्र स्थल है, जो पन्ना टाइगर रिजर्व के चंद्रनगर के पास स्थित है। यह धाम भगवान शिव को समर्पित है और स्थानीय आस्था का केंद्र माना जाता है।

26 मई को पदयात्रा का आयोजन

सोमवती अमावस्या (26 मई 2025) के अवसर पर स्वर्गेश्वर धाम की सुरक्षा और संरक्षण के समर्थन में एक विशेष पदयात्रा का आयोजन किया जा रहा है। यह यात्रा छतरपुर जिले के टोरिया स्थित श्रीराम मंदिर से सुबह 8 बजे प्रारंभ होगी और स्वर्गेश्वर धाम तक जाएगी। इस आयोजन का उद्देश्य धाम की उपेक्षा के खिलाफ जनजागरण और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है। 

धाम में चोरी की घटना

हाल ही में स्वर्गेश्वर धाम में चोरी की एक घटना सामने आई है, जिसमें मंदिर परिसर से घंटे चुरा लिए गए। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही की आलोचना हो रही है। 

प्रशासनिक उपेक्षा और संरक्षण की मांग

स्वर्गेश्वर धाम की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के बावजूद, यह स्थल प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी इस संबंध में पत्र लिखा गया है। 

पर्यटन से जोड़ने की पहल

धाम को पर्यटन से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि स्वर्गेश्वर धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्रीय धरोहर भी है। इसलिए इसे संरक्षित कर पर्यटन मानचित्र पर लाना आवश्यक है। 

यदि आप 26 मई को होने वाली पदयात्रा में भाग लेने या स्वर्गेश्वर धाम के संरक्षण में सहयोग करना चाहते हैं, तो स्थानीय आयोजकों से संपर्क कर सकते हैं। यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

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