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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

पन्ना टाइगर रिजर्व में स्वर्गेश्वर धाम से घंटे चोरी – चुप है प्रशासन, गूंज रहा सवाल – क्या ऐसे बनेगा हिंदू राष्ट्र ?

ओबेरॉय ग्रुप के होटल निर्माण में तेजी,पर भोलेनाथ के धाम का विकास ठप ?
छतरपुर :चंद्रनगर रेंज में स्थित प्राचीन स्वर्गेश्वर धाम में चोरी मंदिर परिसर से सभी घंटे चुरा ले गए चोर घटना को कई दिन बीत चुके, जांच में अब तक शून्य प्रगति वन मंत्री, पुलिस और टाइगर रिजर्व अधिकारी सभी खामोश
आस्था पर हमला या प्रशासनिक लापरवाही? 

पन्ना टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले प्राचीन स्वर्गेश्वर धाम में चोरी की बड़ी घटना ने ना सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आस्था को भी गहरा आघात पहुंचाया है।

चंद्रनगर रेंज में स्थित इस धार्मिक स्थल से चोरों ने मंदिर परिसर के सभी घंटे उखाड़ लिए घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन **पुलिस और रिजर्व प्रशासन दोनों ही खाली हाथ हैं।

अब बड़ा सवाल ये उठता है –जब पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर स्थित एक मंदिर ही सुरक्षित नहीं, तो ये प्रशासन वन्यजीवों की सुरक्षा कैसे कर रहा है?
भेष कीमती सागौन के पेड़ों की तस्करी को ये लोग कैसे रोक पा रहे होंगे ?

और वहीं दूसरी तरफ,राजगढ़ पेलेस में ओबेरॉय ग्रुप के होटल निर्माण का काम तेज़ी से चल रहा है,वहां कोई रुकावट नहीं है।

तो फिर भोलेनाथ के स्थान पर विकास क्यों नहीं ?
क्या आस्था के प्रतीकों को नजरअंदाज कर सिर्फ कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जा रही है?

यह मामला खजुराहो लोकसभा और राजनगर विधानसभा क्षेत्र का है, और सबसे बड़ी बात –जिले में खुद वन मंत्री होने के बावजूद कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई है।

तो फिर सवाल जनता पूछ रही है –
क्या ये जंगल बचे रहेंगे? क्या आस्था बची रहेगी? क्या ऐसे बनेगा हिंदू राष्ट्र ?

अब जनता सिर्फ जवाब नहीं चाहती – कार्रवाई और बदलाव चाहती है।

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