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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

पन्ना टाइगर रिजर्व में स्वर्गेश्वर धाम से घंटे चोरी – चुप है प्रशासन, गूंज रहा सवाल – क्या ऐसे बनेगा हिंदू राष्ट्र ?

ओबेरॉय ग्रुप के होटल निर्माण में तेजी,पर भोलेनाथ के धाम का विकास ठप ?
छतरपुर :चंद्रनगर रेंज में स्थित प्राचीन स्वर्गेश्वर धाम में चोरी मंदिर परिसर से सभी घंटे चुरा ले गए चोर घटना को कई दिन बीत चुके, जांच में अब तक शून्य प्रगति वन मंत्री, पुलिस और टाइगर रिजर्व अधिकारी सभी खामोश
आस्था पर हमला या प्रशासनिक लापरवाही? 

पन्ना टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले प्राचीन स्वर्गेश्वर धाम में चोरी की बड़ी घटना ने ना सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आस्था को भी गहरा आघात पहुंचाया है।

चंद्रनगर रेंज में स्थित इस धार्मिक स्थल से चोरों ने मंदिर परिसर के सभी घंटे उखाड़ लिए घटना को कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन **पुलिस और रिजर्व प्रशासन दोनों ही खाली हाथ हैं।

अब बड़ा सवाल ये उठता है –जब पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर स्थित एक मंदिर ही सुरक्षित नहीं, तो ये प्रशासन वन्यजीवों की सुरक्षा कैसे कर रहा है?
भेष कीमती सागौन के पेड़ों की तस्करी को ये लोग कैसे रोक पा रहे होंगे ?

और वहीं दूसरी तरफ,राजगढ़ पेलेस में ओबेरॉय ग्रुप के होटल निर्माण का काम तेज़ी से चल रहा है,वहां कोई रुकावट नहीं है।

तो फिर भोलेनाथ के स्थान पर विकास क्यों नहीं ?
क्या आस्था के प्रतीकों को नजरअंदाज कर सिर्फ कमर्शियल प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी जा रही है?

यह मामला खजुराहो लोकसभा और राजनगर विधानसभा क्षेत्र का है, और सबसे बड़ी बात –जिले में खुद वन मंत्री होने के बावजूद कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई है।

तो फिर सवाल जनता पूछ रही है –
क्या ये जंगल बचे रहेंगे? क्या आस्था बची रहेगी? क्या ऐसे बनेगा हिंदू राष्ट्र ?

अब जनता सिर्फ जवाब नहीं चाहती – कार्रवाई और बदलाव चाहती है।

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