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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

कक्षा में सोती मिली मैडम,बच्चों ने कहा रोज़ का है ये हाल राजनगर जनपद शिक्षा केंद्र क्षेत्र का मामला

कक्षा में सोती मिली शिक्षिका,बच्चों ने लगाए रोज़ाना नींद में रहने के आरोप


छतरपुर। राजनगर जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत भीयांताल माध्यमिक विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था की एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां पदस्थ प्रभारी शिक्षिका विमलेश गुप्ता कक्षा के बीच बच्चों के सामने नींद में लीन नजर आईं। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई है।

विद्यालय के छात्रों ने बताया कि यह रोज़ का नज़ारा है। मैडम हर दिन पढ़ाने की बजाय कक्षा में सो जाती हैं। इतना ही नहीं, कई बार बिना किसी सूचना के स्कूल से छुट्टी पर भी रहती हैं। बच्चों के अनुसार, पढ़ाई से ज़्यादा शिक्षिका की नींद और गैरहाजिरी देखने को मिलती है।

स्थानीय ग्रामीणों ने भी बताया कि शिक्षिका की लापरवाही लंबे समय से जारी है। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। स्कूल की गिरती स्थिति को देख अभिभावकों में भी आक्रोश है।

मामला जब मीडिया की सुर्खियों में आया तो चंद्रनगर शंकुल प्राचार्य केके अग्निहोत्री ने कहा कि मामले की जानकारी उन्हें मिली है और जल्द जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

अब बड़ा सवाल यही है — क्या इस बार शिक्षिका पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर एक बार फिर खानापूर्ति कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?



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