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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

कक्षा में सोती मिली मैडम,बच्चों ने कहा रोज़ का है ये हाल राजनगर जनपद शिक्षा केंद्र क्षेत्र का मामला

कक्षा में सोती मिली शिक्षिका,बच्चों ने लगाए रोज़ाना नींद में रहने के आरोप


छतरपुर। राजनगर जनपद शिक्षा केंद्र अंतर्गत भीयांताल माध्यमिक विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था की एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहां पदस्थ प्रभारी शिक्षिका विमलेश गुप्ता कक्षा के बीच बच्चों के सामने नींद में लीन नजर आईं। यह पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई है।

विद्यालय के छात्रों ने बताया कि यह रोज़ का नज़ारा है। मैडम हर दिन पढ़ाने की बजाय कक्षा में सो जाती हैं। इतना ही नहीं, कई बार बिना किसी सूचना के स्कूल से छुट्टी पर भी रहती हैं। बच्चों के अनुसार, पढ़ाई से ज़्यादा शिक्षिका की नींद और गैरहाजिरी देखने को मिलती है।

स्थानीय ग्रामीणों ने भी बताया कि शिक्षिका की लापरवाही लंबे समय से जारी है। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। स्कूल की गिरती स्थिति को देख अभिभावकों में भी आक्रोश है।

मामला जब मीडिया की सुर्खियों में आया तो चंद्रनगर शंकुल प्राचार्य केके अग्निहोत्री ने कहा कि मामले की जानकारी उन्हें मिली है और जल्द जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

अब बड़ा सवाल यही है — क्या इस बार शिक्षिका पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या फिर एक बार फिर खानापूर्ति कर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?



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