Skip to main content

BREAKING NEWS

मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

इतिहास में कंस,आज कौन ? छतरपुर के बमीठा में कृष्ण जन्मोत्सव आयोजन पर लगी रोक पर उठे सवाल,मोहन राज में कृष्ण महोत्सव पर रोक क्यों ?

कृष्ण जन्मोत्सव में आई बाधाएं इतिहास से लेकर आज तक 

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल भक्ति और प्रेम की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष और बाधाओं को पार करने की प्रेरणा भी है। जन्म से लेकर बाल्यकाल तक, हर कदम पर उनके मार्ग में रुकावटें खड़ी की गईं फिर चाहे वह कंस का अत्याचार हो,यमुना का तेज़ बहाव,या असुरों के लगातार हमले।

इतिहास की बाधाएं

कृष्ण का जन्म कारागार में हुआ। मामा कंस ने भविष्यवाणी सुनी कि देवकी का आठवां पुत्र ही उसका अंत करेगा, इसलिए उसने माता-पिता को जेल में डाल दिया। जन्म की रात,वासुदेव जी ने शिशु कृष्ण को टोकरी में रखकर मथुरा से गोकुल पहुंचाने का प्रयास किया। रास्ते में मूसलधार बारिश और यमुना का प्रचंड बहाव भी उनकी राह में बाधा बना। लेकिन ईश्वरीय शक्ति से सभी रुकावटें दूर हुईं। बचपन में पूतना, शकटासुर, त्रिणावर्त जैसे राक्षसों को भेजा गया,मगर हर बार कृष्ण ने खतरे को हराकर भक्ति और धर्म की रक्षा की।

आज की बाधाएं छतरपुर के बमीठा की घटना

इतिहास की ये बाधाएं केवल पौराणिक कथाएं नहीं,बल्कि आज भी हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि धर्म और आस्था के मार्ग में रुकावटें क्यों आती हैं। हाल ही में छतरपुर जिले के बमीठा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन अचानक रद्द कर दिया गया। वर्षों से होता आ रहा यह कार्यक्रम इस बार न हो पाने से स्थानीय लोगों में निराशा और नाराजगी है। और कई सवाल है 

समिति और समाज की जिम्मेदारी

अगर आयोजन में प्रशासनिक, राजनीतिक या सामाजिक कारणों से बाधा उत्पन्न हो रही हो,तो समिति के सदस्यों का दायित्व है कि वह आगे आकर सच्चाई बताएं। कृष्ण की कथा हमें यही सिखाती है धर्म की रक्षा के लिए साहस, एकता और पारदर्शिता जरूरी है। आज जरूरत है कि हम गोकुलवासियों की तरह संगठित हों और आस्था के पर्व को जीवित रखें।

Comments