Skip to main content

BREAKING NEWS

केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

इतिहास में कंस,आज कौन ? छतरपुर के बमीठा में कृष्ण जन्मोत्सव आयोजन पर लगी रोक पर उठे सवाल,मोहन राज में कृष्ण महोत्सव पर रोक क्यों ?

कृष्ण जन्मोत्सव में आई बाधाएं इतिहास से लेकर आज तक 

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल भक्ति और प्रेम की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष और बाधाओं को पार करने की प्रेरणा भी है। जन्म से लेकर बाल्यकाल तक, हर कदम पर उनके मार्ग में रुकावटें खड़ी की गईं फिर चाहे वह कंस का अत्याचार हो,यमुना का तेज़ बहाव,या असुरों के लगातार हमले।

इतिहास की बाधाएं

कृष्ण का जन्म कारागार में हुआ। मामा कंस ने भविष्यवाणी सुनी कि देवकी का आठवां पुत्र ही उसका अंत करेगा, इसलिए उसने माता-पिता को जेल में डाल दिया। जन्म की रात,वासुदेव जी ने शिशु कृष्ण को टोकरी में रखकर मथुरा से गोकुल पहुंचाने का प्रयास किया। रास्ते में मूसलधार बारिश और यमुना का प्रचंड बहाव भी उनकी राह में बाधा बना। लेकिन ईश्वरीय शक्ति से सभी रुकावटें दूर हुईं। बचपन में पूतना, शकटासुर, त्रिणावर्त जैसे राक्षसों को भेजा गया,मगर हर बार कृष्ण ने खतरे को हराकर भक्ति और धर्म की रक्षा की।

आज की बाधाएं छतरपुर के बमीठा की घटना

इतिहास की ये बाधाएं केवल पौराणिक कथाएं नहीं,बल्कि आज भी हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि धर्म और आस्था के मार्ग में रुकावटें क्यों आती हैं। हाल ही में छतरपुर जिले के बमीठा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन अचानक रद्द कर दिया गया। वर्षों से होता आ रहा यह कार्यक्रम इस बार न हो पाने से स्थानीय लोगों में निराशा और नाराजगी है। और कई सवाल है 

समिति और समाज की जिम्मेदारी

अगर आयोजन में प्रशासनिक, राजनीतिक या सामाजिक कारणों से बाधा उत्पन्न हो रही हो,तो समिति के सदस्यों का दायित्व है कि वह आगे आकर सच्चाई बताएं। कृष्ण की कथा हमें यही सिखाती है धर्म की रक्षा के लिए साहस, एकता और पारदर्शिता जरूरी है। आज जरूरत है कि हम गोकुलवासियों की तरह संगठित हों और आस्था के पर्व को जीवित रखें।

Comments