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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

छतरपुर के बमीठा में जूते सिलने वाले मोचियों का दर्द मेहनत की क़ीमत और समाज की अनदेखी ?

ग्राम पंचायत की लापरवाही से पीरा गांव में गंदगी का साम्राज्य, प्रशासन की चुप्पी बनी सवाल

2025 का आगमन केवल एक कैलेंडर परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन में एक नई शुरुआत का प्रतीक है

पत्रकारिता का क्षेत्र न केवल चुनौतीपूर्ण है, बल्कि इसमें हर दिन नए संघर्षों का सामना करना पड़ता है

आस्था पर चोट, छतरपुर में बेखबर जिम्मेदार – यहां बच्चों के भविष्य को भी खतरा

25 दिसंबर को खजुराहो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास

सफलता तक पहुँचने का रास्ता कभी सीधा नहीं होता

खजुराहो : दो दिन में उखड़ी प्रधान मंत्री सड़क ने बनाया नया रिकॉर्ड, क्या सड़क निर्माण कंपनी को मिलना चाहिए ऑस्कर अवॉर्ड ?

सिंघाड़ा बेचती बूढ़ी अम्मा,ले लो भैया सपोर्ट लोकल