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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

25 दिसंबर को खजुराहो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास

खजुराहो, 24 दिसंबर – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 दिसंबर को मध्य प्रदेश के खजुराहो पहुंचेंगे, जहां वे भारत की पहली नदी जोड़ो परियोजना के तहत केन-बेतवा लिंक परियोजना का शिलान्यास करेंगे। इस परियोजना का उद्देश्य बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट को दूर करना है और इस पर लगभग 44 हजार करोड़ रुपये अधिक लागत आएगी। 

यह परियोजना पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था, जिसे अब प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साकार किया जाएगा। इसके तहत, केन और बेतवा नदियों को जोड़ने का काम किया जाएगा, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र में जल की आपूर्ति बेहतर होगी और लाखों लोगों को पीने का पानी मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी इस परियोजना के अंतर्गत भूमि पूजन भी करेंगे, और इसके बाद इस परियोजना के कार्य का शुभारंभ होगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की पहली ऐसी नदी जोड़ो परियोजना होगी, जिसका कार्य भूमि पर प्रारंभ हो रहा है और इसका उद्देश्य पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए क्षेत्रीय जल संकट को हल करना है।

आयोजन में लाखों लोगों के भाग लेने की संभावना है और इसके मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं। 
प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा प्रदेश और देशभर के लोगों के लिए ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है, और इस परियोजना के जरिए बुंदेलखंड में विकास की नई राह खुलेगी।

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