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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

खजुराहो : दो दिन में उखड़ी प्रधान मंत्री सड़क ने बनाया नया रिकॉर्ड, क्या सड़क निर्माण कंपनी को मिलना चाहिए ऑस्कर अवॉर्ड ?

सरकारें जिन विकास के दावों को लेकर अपना पीठ थपथपाती है उन विकास के दावों की पोल खुलती है ग्राउंड जीरो पर 
छतरपुर पन्ना नेशनल हाईवे 39 पर बसे टोरिया गांव से सूरजपुर तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क की दुर्दशा देखकर लगता है कि निर्माण कंपनी को कोई बड़ा पुरस्कार दिया जाना चाहिए महज दो ही दिन में सड़क का ऐसा हाल हुआ है, जैसे ठेकेदारों ने निर्माण से ज्यादा उखाड़ने की प्रतियोगिता में भाग लिया हो दो दिन में सड़क उखड़ने का यह कोई साधारण काम तो नहीं है मानो ऐसा लगता है जैसे कंपनी ने ‘सड़क उखाड़ने’ को अपनी कला बना लिया है
गांव के लोगों में काफी नाराजगी है बताया गया पहले से ज्यादा घटिया निर्माण कर दिया गया है लोग अब यह समझने में लगे हैं कि क्या यह सड़क निर्माण है या फिर किसी प्रकार का ‘कौशल प्रदर्शन’? एक स्थानीय निवासी ने तो मजाक करते हुए कहा, "अगर दो दिन में सड़क उखड़ने का कोई अवॉर्ड मिलता, तो यह कंपनी सबसे बड़ा विजेता होती।
स्थानीय प्रशासन की चुप्पी भी इस स्थिति को और हास्यास्पद बना देती है। लगता है जैसे उन्हें भी यह सब एक मजाक लगता हो, क्योंकि न तो सड़क की गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया ?
कुल मिलाकर, इस सड़क ने साबित कर दिया  ‘जल्दबाजी’ का कोई अवॉर्ड होता, तो वह अब तक का सबसे बड़ा विजेता बन चुकी होती। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह हमारी सड़कों की 'गुणवत्ता' का असली परफॉर्मेंस है, या महज एक मजाक? आखिर विकास के नाम पर इतना बड़ा मजाक क्यों ?

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