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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

खजुराहो : दो दिन में उखड़ी प्रधान मंत्री सड़क ने बनाया नया रिकॉर्ड, क्या सड़क निर्माण कंपनी को मिलना चाहिए ऑस्कर अवॉर्ड ?

सरकारें जिन विकास के दावों को लेकर अपना पीठ थपथपाती है उन विकास के दावों की पोल खुलती है ग्राउंड जीरो पर 
छतरपुर पन्ना नेशनल हाईवे 39 पर बसे टोरिया गांव से सूरजपुर तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़क की दुर्दशा देखकर लगता है कि निर्माण कंपनी को कोई बड़ा पुरस्कार दिया जाना चाहिए महज दो ही दिन में सड़क का ऐसा हाल हुआ है, जैसे ठेकेदारों ने निर्माण से ज्यादा उखाड़ने की प्रतियोगिता में भाग लिया हो दो दिन में सड़क उखड़ने का यह कोई साधारण काम तो नहीं है मानो ऐसा लगता है जैसे कंपनी ने ‘सड़क उखाड़ने’ को अपनी कला बना लिया है
गांव के लोगों में काफी नाराजगी है बताया गया पहले से ज्यादा घटिया निर्माण कर दिया गया है लोग अब यह समझने में लगे हैं कि क्या यह सड़क निर्माण है या फिर किसी प्रकार का ‘कौशल प्रदर्शन’? एक स्थानीय निवासी ने तो मजाक करते हुए कहा, "अगर दो दिन में सड़क उखड़ने का कोई अवॉर्ड मिलता, तो यह कंपनी सबसे बड़ा विजेता होती।
स्थानीय प्रशासन की चुप्पी भी इस स्थिति को और हास्यास्पद बना देती है। लगता है जैसे उन्हें भी यह सब एक मजाक लगता हो, क्योंकि न तो सड़क की गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया ?
कुल मिलाकर, इस सड़क ने साबित कर दिया  ‘जल्दबाजी’ का कोई अवॉर्ड होता, तो वह अब तक का सबसे बड़ा विजेता बन चुकी होती। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह हमारी सड़कों की 'गुणवत्ता' का असली परफॉर्मेंस है, या महज एक मजाक? आखिर विकास के नाम पर इतना बड़ा मजाक क्यों ?

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