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छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं। यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है। पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...
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SAMEER AWASTHI
आस्था पर चोट, छतरपुर में बेखबर जिम्मेदार – यहां बच्चों के भविष्य को भी खतरा
स्थान: छतरपुर रिपोर्टर: समीर अवस्थी
छतरपुर जिले में प्रशासन की अनदेखी के कारण अब लोगों की आस्था पर गहरी चोट पहुंचाई जा रही है। मामला बमीठा थाना क्षेत्र के सूरजपुर ग्राम पंचायत स्थित सिद्धेश्वर धाम मंदिर और उसके पास के सरकारी स्कूल के आसपास अवैध उत्खनन का है।स्थानीय लोगों का कहना है खजुराहो सिंगरौली रेलवे लाइन निर्माण के लिए काम कर रहे ठेकेदारों द्वारा शासकीय भूमि पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है, जिससे धार्मिक स्थल के साथ-साथ बच्चों के भविष्य के लिए भी खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदारों ने सिद्धेश्वर धाम मंदिर के पास की पहाड़ी और विद्यालय के पीछे अवैध खनन कर डाला, जो न केवल इलाके की प्राकृतिक स्थिति को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यहां रहने वाले लोगों और बच्चों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहा है।मंदिर के पुजारी ने बताया कि यह मंदिर उनके लिए एक पवित्र स्थान है और खनन की वजह से यहां के माहौल में बदलाव आया है। "जमीन खुदी हुई है और मंदिर के आसपास के क्षेत्र को नुकसान पहुंचा रहा है
विद्यालय में कार्यरत शिक्षक ने बताया कि बच्चों के लिए यह खनन कार्य खतरनाक है। "यहां बच्चे पढ़ाई करने आते हैं, लेकिन खनन से उठने वाली धूल और मलबे के कारण उनकी सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है," शिक्षक ने अपनी चिंता करते हुए कहा शिकायतों के बावजूद प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है
जिससे स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आंदोलन करने पर विवश होंगे और इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
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