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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

फटा तिरंगा,गंदगी में बाबा साहेब,ये लापरवाही नहीं अपराध है

खजुराहो रेलवे स्टेशन से आई शर्मनाक तस्वीरें: फटा तिरंगा और गंदगी में मिली बाबा साहेब की तस्वीर

पर्यटन नगरी के रूप में विश्वभर में मशहूर खजुराहो एक गंभीर शर्मिंदगी का कारण बन गया है। खजुराहो रेलवे स्टेशन से आई तस्वीरों ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की लापरवाही उजागर की है, बल्कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति हमारे बदलते रवैये पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

फटा तिरंगा लहराता रहा,किसी ने नहीं देखा!

खजुराहो रेलवे स्टेशन परिसर में लगा राष्ट्रीय ध्वज – जो हर भारतीय के सम्मान और स्वाभिमान का प्रतीक है – वह फटा हुआ कई घंटों तक लहराता रहा। ध्वज संहिता (Flag Code of India) के अनुसार, फटा या मुरझाया हुआ झंडा सार्वजनिक स्थल पर नहीं फहराया जा सकता। लेकिन स्टेशन पर न तो किसी अधिकारी ने इस पर ध्यान दिया और न ही किसी कर्मचारी ने इसकी मरम्मत की जहमत उठाई।

बाबा साहेब की तस्वीर कचरे में मिली

घटना को और शर्मनाक बना दी एक और तस्वीर ने — जोकि भारत रत्न, संविधान निर्माता और सामाजिक न्याय के प्रतीक डॉ. भीमराव अंबेडकर की थी। यह तस्वीर रेलवे स्टेशन के पास कचरे में गिरी हुई मिली।

मीडिया रिपोर्टिंग के बाद मचा हड़कंप

जब यह मामला मीडिया में आया, तो आनन-फानन में रेलवे के कर्मचारियों ने झंडा और तस्वीर को वहां से हटाया गया !

हालांकि, रेलवे प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। न ही किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है।

सवाल जस का तस

  1. क्या सार्वजनिक जगहों पर लगे राष्ट्रीय प्रतीकों की नियमित निगरानी नहीं होती?

  2. क्या जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ मीडिया के डर से जागते हैं?

  3. क्या बाबा साहेब जैसे महापुरुषों की तस्वीरें अब कचरे में पड़ी मिलेंगी 

  4. हम हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को भाषणों में देशभक्ति की बात करते हैं। लेकिन अगर ज़मीनी हकीकत में तिरंगा फटा मिले और संविधान निर्माता की तस्वीर गंदगी में पड़ी हो — तो ये सवाल बनता है कि क्या हम सिर्फ पर्व मनाना जानते हैं, या उनका सम्मान करना भी?

राष्ट्र और संविधान दोनों शर्मसार

देखिए स्पेशल रिपोर्ट समीर अवस्थी के साथ
https://youtu.be/Pa4AteGIex8?si=6qyr1w1tAwthUxUt

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