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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

फिसलती सुरक्षा,उड़ती जवाबदेही — खजुराहो में बड़ी लापरवाही !

खजुराहो एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला – ट्रेनी एयरक्राफ्ट रनवे पर फिसला, सवालों के घेरे में सुरक्षा और ट्रेनिंग सिस्टम!

छतरपुर जिले के खजुराहो एयरपोर्ट से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। आज दोपहर करीब 3 बजे एक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट रनवे पर फिसल गया। गनीमत रही कि हादसे में कोई जान-माल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े कर गई है – क्या यह सिर्फ एक दुर्घटना थी, या फिर कहीं न कहीं प्रशिक्षण संस्थान की लापरवाही इसका कारण बनी?


बताया जा रहा है कि यह हादसा ट्रेनिंग के दौरान हुआ। एक ट्रेनी पायलट प्रशिक्षण ले रहा था, तभी लैंडिंग के समय एयरक्राफ्ट अचानक रनवे पर फिसल गया। तुरंत अलार्म बजा और बचाव दल मौके पर पहुंचा। ट्रेनी और पायलट दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

हालांकि हादसा टल गया, लेकिन सवाल ये है कि आखिर एक ट्रेनी एयरक्राफ्ट रनवे पर फिसला कैसे? क्या तकनीकी खामी थी? क्या मौसम खराब था? या फिर कहीं न कहीं लापरवाही हुई?


बड़ा सवाल ?

  • क्या संस्थान ने सुरक्षा मानकों का पालन किया था?

  • क्या ट्रेनी को पर्याप्त अनुभव और मार्गदर्शन मिल रहा था?

  • क्या रनवे की स्थिति ठीक थी या रखरखाव में कमी थी?

  • और सबसे बड़ा सवाल – क्या यह एक सिस्टम फेलियर है?


👤 अगर रेस्क्यू टीम समय पर नहीं आती, तो बड़ा हादसा हो सकता था

👤 एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर अब भरोसा करना मुश्किल हो रहा है

अब सवाल यही है ?

👉 क्या इस हादसे की निष्पक्ष जांच होगी?
👉 क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?
👉 क्या ट्रेनिंग सिस्टम में सुधार किया जाएगा?

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक खजुराहो एयरपोर्ट की सुरक्षा और प्रशिक्षण पर सवाल खड़े रहेंगे।


ये सिर्फ एक हादसा नहीं, एक चेतावनी है – सिस्टम को जगाने की! क्या जिम्मेदार लोग जागेंगे? या अगला हादसा किसी की जान लेकर ही सबक सिखाएगा?


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