Skip to main content

BREAKING NEWS

क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

फिसलती सुरक्षा,उड़ती जवाबदेही — खजुराहो में बड़ी लापरवाही !

खजुराहो एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला – ट्रेनी एयरक्राफ्ट रनवे पर फिसला, सवालों के घेरे में सुरक्षा और ट्रेनिंग सिस्टम!

छतरपुर जिले के खजुराहो एयरपोर्ट से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। आज दोपहर करीब 3 बजे एक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट रनवे पर फिसल गया। गनीमत रही कि हादसे में कोई जान-माल का बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े कर गई है – क्या यह सिर्फ एक दुर्घटना थी, या फिर कहीं न कहीं प्रशिक्षण संस्थान की लापरवाही इसका कारण बनी?


बताया जा रहा है कि यह हादसा ट्रेनिंग के दौरान हुआ। एक ट्रेनी पायलट प्रशिक्षण ले रहा था, तभी लैंडिंग के समय एयरक्राफ्ट अचानक रनवे पर फिसल गया। तुरंत अलार्म बजा और बचाव दल मौके पर पहुंचा। ट्रेनी और पायलट दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

हालांकि हादसा टल गया, लेकिन सवाल ये है कि आखिर एक ट्रेनी एयरक्राफ्ट रनवे पर फिसला कैसे? क्या तकनीकी खामी थी? क्या मौसम खराब था? या फिर कहीं न कहीं लापरवाही हुई?


बड़ा सवाल ?

  • क्या संस्थान ने सुरक्षा मानकों का पालन किया था?

  • क्या ट्रेनी को पर्याप्त अनुभव और मार्गदर्शन मिल रहा था?

  • क्या रनवे की स्थिति ठीक थी या रखरखाव में कमी थी?

  • और सबसे बड़ा सवाल – क्या यह एक सिस्टम फेलियर है?


👤 अगर रेस्क्यू टीम समय पर नहीं आती, तो बड़ा हादसा हो सकता था

👤 एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर अब भरोसा करना मुश्किल हो रहा है

अब सवाल यही है ?

👉 क्या इस हादसे की निष्पक्ष जांच होगी?
👉 क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी?
👉 क्या ट्रेनिंग सिस्टम में सुधार किया जाएगा?

जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक खजुराहो एयरपोर्ट की सुरक्षा और प्रशिक्षण पर सवाल खड़े रहेंगे।


ये सिर्फ एक हादसा नहीं, एक चेतावनी है – सिस्टम को जगाने की! क्या जिम्मेदार लोग जागेंगे? या अगला हादसा किसी की जान लेकर ही सबक सिखाएगा?


Comments