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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

कोविड गाइडलाइन का पालन कर किया विवाहविवाह कार्यक्रम में मात्र 5 लोग उपस्थित


छतरपुर, 01 मई 2021

छतरपुर जिले के महाराजपुर तहसील के ग्राम नुना निवासी तेजसिंह चौधरी ने अपनी पुत्री का विवाह सतना जिले के ग्राम बरदाकला के निवासी और म.प्र. गृह निर्माण में कार्यरत कर्मचारी से की। इस विवाह कार्यक्रम की खासियत कोरोना नियम के अनुसार शादी में 10 लोगों की अनुमति होने के बावजूद दोनों पक्षों द्वारा 5-5 लोगांे की उपस्थिति में विवाह सम्पन्न करते हुए समाज के सामने मिसाल कायम की गई। दूल्हा बने एस.के. पटेल ने कहा कि वर्तमान में कोरोना संक्रमण की जो स्थिति बनी है उसे वह बखूबी समझते हैं। स्थिति को समझते ही उन्होंने निर्णय लिया और कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए विवाह रश्म पूरी करी।  

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