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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

बाबा साहेब अंबेडकर जयंती पर टोरिया गांव के आदिवासी पुरवा में साड़ी वितरण कार्यक्रम, सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल

राजनगर (छतरपुर):

संविधान निर्माता और समाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर छतरपुर जिले के राजनगर क्षेत्र के टोरिया गांव स्थित आदिवासी पुरवा में एक विशेष सामाजिक सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उष्णकार चैरिटेबल एवं एजुकेशनल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में आदिवासी महिलाओं को साड़ी वितरित कर सम्मानित किया गया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य बाबा साहेब के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाना और वंचित वर्गों के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम में समाजसेवी संतोष यादव, लोकेंद्र यादव तीरथ यादव, हेमराज यादव ने भाग लिया और आदिवासी समाज की महिलाओं को साड़ी प्रदान की। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम बाबा साहेब के सामाजिक न्याय के सिद्धांतों से प्रेरित है। उनके विचार आज भी समाज में समानता और एकता की भावना को मजबूत करते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • आदिवासी पुरवा की महिलाओं को किया गया सम्मानित

  • उष्णकार ट्रस्ट की ओर से निशुल्क साड़ी वितरण

  • बाबा साहेब अंबेडकर के विचारों को समाज तक पहुंचाने की पहल

  • ग्रामीणों में कार्यक्रम को लेकर उत्साह और प्रसन्नता

ग्रामीणों ने इस आयोजन की जमकर सराहना की और कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं। ट्रस्ट की ओर से यह आश्वासन भी दिया गया कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों की श्रृंखला जारी रहेगी।

डॉ. अंबेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक सामाजिक सेवा का उदाहरण बना, बल्कि आदिवासी पुरवा में सामाजिक समरसता और जागरूकता की अलख भी जगाई।



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