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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

तेजी से फैल रहा छतरपुर में आईपीएल पर सट्टे का नशा, नहीं रुका तो परिणाम बेहद बुरे होंगे

छतरपुर। आईपीएल का सीजन शुरू होते ही छतरपुर जिले में सट्टेबाजी का काला कारोबार एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टे के जरिये युवाओं को जाल में फंसाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, जिले में करीब एक दर्जन सट्टा साइटें सक्रिय हैं जिन पर हजारों युवा दिन-रात दांव लगा रहे हैं।

सिर्फ छतरपुर शहर ही नहीं, बल्कि बड़ामलहरा, गुलगंज, ईशानगर, हरपालपुर, नौगांव, खजुराहो, राजनगर,बमीठा बिजावर, गढ़ीमलहारा, लवकुशनगर और महाराजपुर जैसे कस्बों में भी यह अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है।  

पुलिस की ओर से कार्रवाई की बात तो कही जा रही है, लेकिन यदि आंकड़ों की जांच की जाए तो अब तक की गई कार्यवाही 1 प्रतिशत से भी कम नजर आती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद सटोरिए बेखौफ अपने नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं।

जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। युवा पीढ़ी नशे और सट्टे की गिरफ्त में आकर न केवल अपना भविष्य बर्बाद कर रही है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी चरमरा रही है।

समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि आईपीएल के दौरान विशेष निगरानी अभियान चलाया जाए और इस गोरखधंधे में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

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