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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

संविधान निर्माता की तस्वीर लगी कार्ड से कराई जा रही थी नाबालिग की शादी,प्रशासन ने रोका

भीमराव अंबेडकर के नाम पर कर रहे थे कानून का उल्लंघन,छतरपुर में बाल विवाह पर कार्रवाई

छतरपुर। बमीठा थाना क्षेत्र के मझगुवाँ गांव में नाबालिग लड़की की शादी की तैयारी चल रही थी, जिसे समय रहते प्रशासन ने रोककर एक बड़ी सामाजिक कुप्रथा पर प्रहार किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना मिली थी कि गांव में 16 वर्षीय बालिका का विवाह 29 अप्रैल को आयोजित किया जा रहा है।

सूचना मिलते ही विभाग की सुपरवाइजर मीरा बाजपेई ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचकर त्वरित कार्रवाई की। जाँच में पुष्टि हुई कि बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम है, जिसके बाद विवाह की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया गया।

परिजनों द्वारा आयोजित विवाह कार्यक्रम में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर वाले निमंत्रण पत्र भी बांटे गए थे। परंतु विडंबना यह रही कि संविधान की मूल आत्मा — समानता और बाल संरक्षण के अधिकार — के विरुद्ध जाकर एक मासूम का भविष्य खतरे में डाला जा रहा था।

सुपरवाइजर मीरा बाजपेई ने परिवार को बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही ग्रामीणों को भी बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके सामाजिक व कानूनी प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया है।

बाल विवाह निषेध अधिनियम के अनुसार, लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। इस कानून के उल्लंघन पर संबंधित पक्षों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान है।

फिलहाल प्रशासन द्वारा मामले की विधिवत रिपोर्ट तैयार कर आगे की आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आज भी समाज के कई हिस्सों में जागरूकता और शिक्षा के अभाव में बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ जीवित हैं। ऐसे में सतर्कता और सख्त कार्यवाही ही इस सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाने का एकमात्र उपाय प्रतीत होता है।


बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के प्रमुख बिंदु:

  • लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु: 18 वर्ष

  • लड़कों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु: 21 वर्ष

  • उल्लंघन पर सजा: दो वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों।



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