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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

संविधान निर्माता की तस्वीर लगी कार्ड से कराई जा रही थी नाबालिग की शादी,प्रशासन ने रोका

भीमराव अंबेडकर के नाम पर कर रहे थे कानून का उल्लंघन,छतरपुर में बाल विवाह पर कार्रवाई

छतरपुर। बमीठा थाना क्षेत्र के मझगुवाँ गांव में नाबालिग लड़की की शादी की तैयारी चल रही थी, जिसे समय रहते प्रशासन ने रोककर एक बड़ी सामाजिक कुप्रथा पर प्रहार किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना मिली थी कि गांव में 16 वर्षीय बालिका का विवाह 29 अप्रैल को आयोजित किया जा रहा है।

सूचना मिलते ही विभाग की सुपरवाइजर मीरा बाजपेई ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचकर त्वरित कार्रवाई की। जाँच में पुष्टि हुई कि बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम है, जिसके बाद विवाह की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया गया।

परिजनों द्वारा आयोजित विवाह कार्यक्रम में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर वाले निमंत्रण पत्र भी बांटे गए थे। परंतु विडंबना यह रही कि संविधान की मूल आत्मा — समानता और बाल संरक्षण के अधिकार — के विरुद्ध जाकर एक मासूम का भविष्य खतरे में डाला जा रहा था।

सुपरवाइजर मीरा बाजपेई ने परिवार को बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही ग्रामीणों को भी बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके सामाजिक व कानूनी प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया है।

बाल विवाह निषेध अधिनियम के अनुसार, लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। इस कानून के उल्लंघन पर संबंधित पक्षों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान है।

फिलहाल प्रशासन द्वारा मामले की विधिवत रिपोर्ट तैयार कर आगे की आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आज भी समाज के कई हिस्सों में जागरूकता और शिक्षा के अभाव में बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ जीवित हैं। ऐसे में सतर्कता और सख्त कार्यवाही ही इस सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाने का एकमात्र उपाय प्रतीत होता है।


बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के प्रमुख बिंदु:

  • लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु: 18 वर्ष

  • लड़कों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु: 21 वर्ष

  • उल्लंघन पर सजा: दो वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों।



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