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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

संविधान निर्माता की तस्वीर लगी कार्ड से कराई जा रही थी नाबालिग की शादी,प्रशासन ने रोका

भीमराव अंबेडकर के नाम पर कर रहे थे कानून का उल्लंघन,छतरपुर में बाल विवाह पर कार्रवाई

छतरपुर। बमीठा थाना क्षेत्र के मझगुवाँ गांव में नाबालिग लड़की की शादी की तैयारी चल रही थी, जिसे समय रहते प्रशासन ने रोककर एक बड़ी सामाजिक कुप्रथा पर प्रहार किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना मिली थी कि गांव में 16 वर्षीय बालिका का विवाह 29 अप्रैल को आयोजित किया जा रहा है।

सूचना मिलते ही विभाग की सुपरवाइजर मीरा बाजपेई ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचकर त्वरित कार्रवाई की। जाँच में पुष्टि हुई कि बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम है, जिसके बाद विवाह की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया गया।

परिजनों द्वारा आयोजित विवाह कार्यक्रम में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर वाले निमंत्रण पत्र भी बांटे गए थे। परंतु विडंबना यह रही कि संविधान की मूल आत्मा — समानता और बाल संरक्षण के अधिकार — के विरुद्ध जाकर एक मासूम का भविष्य खतरे में डाला जा रहा था।

सुपरवाइजर मीरा बाजपेई ने परिवार को बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही ग्रामीणों को भी बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके सामाजिक व कानूनी प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया है।

बाल विवाह निषेध अधिनियम के अनुसार, लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। इस कानून के उल्लंघन पर संबंधित पक्षों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान है।

फिलहाल प्रशासन द्वारा मामले की विधिवत रिपोर्ट तैयार कर आगे की आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आज भी समाज के कई हिस्सों में जागरूकता और शिक्षा के अभाव में बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ जीवित हैं। ऐसे में सतर्कता और सख्त कार्यवाही ही इस सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाने का एकमात्र उपाय प्रतीत होता है।


बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के प्रमुख बिंदु:

  • लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु: 18 वर्ष

  • लड़कों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु: 21 वर्ष

  • उल्लंघन पर सजा: दो वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों।



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