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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

संविधान निर्माता की तस्वीर लगी कार्ड से कराई जा रही थी नाबालिग की शादी,प्रशासन ने रोका

भीमराव अंबेडकर के नाम पर कर रहे थे कानून का उल्लंघन,छतरपुर में बाल विवाह पर कार्रवाई

छतरपुर। बमीठा थाना क्षेत्र के मझगुवाँ गांव में नाबालिग लड़की की शादी की तैयारी चल रही थी, जिसे समय रहते प्रशासन ने रोककर एक बड़ी सामाजिक कुप्रथा पर प्रहार किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग को सूचना मिली थी कि गांव में 16 वर्षीय बालिका का विवाह 29 अप्रैल को आयोजित किया जा रहा है।

सूचना मिलते ही विभाग की सुपरवाइजर मीरा बाजपेई ने पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचकर त्वरित कार्रवाई की। जाँच में पुष्टि हुई कि बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम है, जिसके बाद विवाह की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रुकवा दिया गया।

परिजनों द्वारा आयोजित विवाह कार्यक्रम में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर वाले निमंत्रण पत्र भी बांटे गए थे। परंतु विडंबना यह रही कि संविधान की मूल आत्मा — समानता और बाल संरक्षण के अधिकार — के विरुद्ध जाकर एक मासूम का भविष्य खतरे में डाला जा रहा था।

सुपरवाइजर मीरा बाजपेई ने परिवार को बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही ग्रामीणों को भी बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके सामाजिक व कानूनी प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया है।

बाल विवाह निषेध अधिनियम के अनुसार, लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। इस कानून के उल्लंघन पर संबंधित पक्षों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान है।

फिलहाल प्रशासन द्वारा मामले की विधिवत रिपोर्ट तैयार कर आगे की आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आज भी समाज के कई हिस्सों में जागरूकता और शिक्षा के अभाव में बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ जीवित हैं। ऐसे में सतर्कता और सख्त कार्यवाही ही इस सामाजिक बुराई पर अंकुश लगाने का एकमात्र उपाय प्रतीत होता है।


बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के प्रमुख बिंदु:

  • लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु: 18 वर्ष

  • लड़कों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु: 21 वर्ष

  • उल्लंघन पर सजा: दो वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों।



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