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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

पहलगाम में आतंकी हमला देश में मातम स्टेडियम में महफ़िल क्या मैच आम नागरिकों की जानों से ज़्यादा जरूरी है ?

मासूमों की जान गई, देश गमगीन... पर स्टेडियम में अब भी गूंज रहे हैं चौकों-छक्कों के शोर।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को हिला कर रख दिया। कई निर्दोष नागरिकों की जान चली गई – वो भी अचानक, बिना किसी गुनाह के। इनमें कई भारतीय पर्यटक थे, जो सिर्फ़ सुकून की तलाश में निकले थे, लेकिन मौत ने उन्हें घेर लिया। पूरे देश में मातम है। हर दिल भारी है। हर आंख नम है। लेकिन शायद ये शोक सिर्फ़ आम लोगों तक सीमित है।क्योंकि देश का सबसे बड़ा मनोरंजन मेला – IPL 2025– पूरे जोश में जारी है। आज चेन्नई सुपर किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मैच खेला जा रहा है – जैसे कुछ हुआ ही नहीं! क्या संवेदनाएं अब स्पॉन्सरशिप से कमज़ोर हो चुकी हैं? क्या करोड़ों का क्रिकेट तमाशा, लाखों दिलों के दर्द से बड़ा हो गया है? सरकार और आयोजकों ने अब तक IPL को रोकने का कोई संकेत नहीं दिया है। जनता पूछ रही है जब पूरा देश रो रहा है, तब IPL क्यों हँस रहा है ? क्या ये वही भारत है, जहाँ एक जवान के शहीद होने पर सिनेमा हॉल में शो रोके जाते थे? क्या अब TRP की चमक में इंसानियत की परछाईं भी खो गई है ? IPL चल रहा है, टिकट बिक रहे हैं, ब्रांड्स चमक रहे हैं – पर सवाल ये है क्या हम दिल से साथ हैं, या सिर्फ़ डिजिटल सहानुभूति में उलझ चुके हैं?

देश को सोचने की ज़रूरत है...क्या हमारी प्राथमिकताएं बदल गई हैं ? क्या आज एक मैच, आम नागरिकों की जानों से ज़्यादा जरूरी है?

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