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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

पहलगाम में आतंकी हमला देश में मातम स्टेडियम में महफ़िल क्या मैच आम नागरिकों की जानों से ज़्यादा जरूरी है ?

मासूमों की जान गई, देश गमगीन... पर स्टेडियम में अब भी गूंज रहे हैं चौकों-छक्कों के शोर।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को हिला कर रख दिया। कई निर्दोष नागरिकों की जान चली गई – वो भी अचानक, बिना किसी गुनाह के। इनमें कई भारतीय पर्यटक थे, जो सिर्फ़ सुकून की तलाश में निकले थे, लेकिन मौत ने उन्हें घेर लिया। पूरे देश में मातम है। हर दिल भारी है। हर आंख नम है। लेकिन शायद ये शोक सिर्फ़ आम लोगों तक सीमित है।क्योंकि देश का सबसे बड़ा मनोरंजन मेला – IPL 2025– पूरे जोश में जारी है। आज चेन्नई सुपर किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मैच खेला जा रहा है – जैसे कुछ हुआ ही नहीं! क्या संवेदनाएं अब स्पॉन्सरशिप से कमज़ोर हो चुकी हैं? क्या करोड़ों का क्रिकेट तमाशा, लाखों दिलों के दर्द से बड़ा हो गया है? सरकार और आयोजकों ने अब तक IPL को रोकने का कोई संकेत नहीं दिया है। जनता पूछ रही है जब पूरा देश रो रहा है, तब IPL क्यों हँस रहा है ? क्या ये वही भारत है, जहाँ एक जवान के शहीद होने पर सिनेमा हॉल में शो रोके जाते थे? क्या अब TRP की चमक में इंसानियत की परछाईं भी खो गई है ? IPL चल रहा है, टिकट बिक रहे हैं, ब्रांड्स चमक रहे हैं – पर सवाल ये है क्या हम दिल से साथ हैं, या सिर्फ़ डिजिटल सहानुभूति में उलझ चुके हैं?

देश को सोचने की ज़रूरत है...क्या हमारी प्राथमिकताएं बदल गई हैं ? क्या आज एक मैच, आम नागरिकों की जानों से ज़्यादा जरूरी है?

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