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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

पहलगाम में आतंकी हमला देश में मातम स्टेडियम में महफ़िल क्या मैच आम नागरिकों की जानों से ज़्यादा जरूरी है ?

मासूमों की जान गई, देश गमगीन... पर स्टेडियम में अब भी गूंज रहे हैं चौकों-छक्कों के शोर।
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को हिला कर रख दिया। कई निर्दोष नागरिकों की जान चली गई – वो भी अचानक, बिना किसी गुनाह के। इनमें कई भारतीय पर्यटक थे, जो सिर्फ़ सुकून की तलाश में निकले थे, लेकिन मौत ने उन्हें घेर लिया। पूरे देश में मातम है। हर दिल भारी है। हर आंख नम है। लेकिन शायद ये शोक सिर्फ़ आम लोगों तक सीमित है।क्योंकि देश का सबसे बड़ा मनोरंजन मेला – IPL 2025– पूरे जोश में जारी है। आज चेन्नई सुपर किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मैच खेला जा रहा है – जैसे कुछ हुआ ही नहीं! क्या संवेदनाएं अब स्पॉन्सरशिप से कमज़ोर हो चुकी हैं? क्या करोड़ों का क्रिकेट तमाशा, लाखों दिलों के दर्द से बड़ा हो गया है? सरकार और आयोजकों ने अब तक IPL को रोकने का कोई संकेत नहीं दिया है। जनता पूछ रही है जब पूरा देश रो रहा है, तब IPL क्यों हँस रहा है ? क्या ये वही भारत है, जहाँ एक जवान के शहीद होने पर सिनेमा हॉल में शो रोके जाते थे? क्या अब TRP की चमक में इंसानियत की परछाईं भी खो गई है ? IPL चल रहा है, टिकट बिक रहे हैं, ब्रांड्स चमक रहे हैं – पर सवाल ये है क्या हम दिल से साथ हैं, या सिर्फ़ डिजिटल सहानुभूति में उलझ चुके हैं?

देश को सोचने की ज़रूरत है...क्या हमारी प्राथमिकताएं बदल गई हैं ? क्या आज एक मैच, आम नागरिकों की जानों से ज़्यादा जरूरी है?

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