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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

छतरपुर - ऑनलाइन अल्पविराम का दूसरा चरण 13 मई से



कोरोना महामारी की चिंता से मुक्त कराने हेतु ऑनलाइन अल्पविराम कार्यक्रम के पहले चरण की समाप्ति पर प्राप्त फीडबैक से संतुष्ट राज्य आनंद संस्थान के सीईओ अखिलेश कुमार अर्गल ने 13 मई से दूसरा चरण प्रारंभ किए जाने का निर्णय लिया है पूरे प्रदेश में गठित पांच टीमें 6-6 दिनों तक पुनः अल्पविराम कार्यक्रमों को संचालित करेंगी। प्रत्येक टीम के साथ 40 प्रतिभागी ऑनलाइन पंजीयन करा सकेंगे।
छतरपुर से मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी ने आशा असाटी, देवास की प्रा.े समीरा नईम, दमोह के रमेश व्यास व उषा व्यास के साथ एक टीम का कोऑर्डिनेशन किया है। इस टीम के साथ अल्पविराम ले रही देवास की हेमलता सक्सेना ने बताया कि उनकी भाभी प्रीति सक्सेना अरविंदो हॉस्पिटल इंदौर से कोरोना की जंग जीतकर कल ही वापस घर लौटी हैं। 15 अप्रैल से अस्पताल में उनकी स्थिति क्रिटिकल थी पर पूरे परिवार को अल्पविराम ने बहुत बड़ी ताकत दी, भिंड के प्रशांत भदौरिया ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों पर गुस्सा करना कम कर दिया है और सकारात्मकता बढ़ाने के लिए जिम्मेदारियां लेना शुरू की हैं, शिवपुरी के प्रवीण श्रीवास्तव व शाजापुर के नरेंद्र राजपूत ने भी गुस्से पर नियंत्रण पाने की बात कही।

 उज्जैन की गणित प्रोफेसर डॉ सुमन जैन ने कहा कि अब मेरा ध्यान सामने वाले की कमियों की जगह अच्छाइयों पर जाने लगा है, सीहोर के महेंद्र तोमर ने कहा कि उन्हें इस बात से छुटकारा मिल गया है कि सामने वाला उनकी तरह क्यों नहीं सोचता है। इंदौर एसजीआईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रो. विवेक तिवारी ने कहा कि अब तक रिश्तो में जटिलता रहती थी पर अब मनरूस्थिति शांत हुई है, संतोष मिला है कार्यक्षेत्र व घर दोनों में इसका ध्यान रखेंगे। सतना जिले के मझगवां निवासी बृजेंद्र सिंह ने कहा कि वह अब तक अपने आप को बड़ा समाजसेवी समझते थे पर 6 दिनों के अल्पविराम में उनका यह भ्रम टूट गया है अब उन्हें अन्य लोगों द्वारा की जा रही सेवाएं अपने से अधिक श्रेष्ठ लगती हैं। भोपाल के मुकेश गर्ग ने कहा कि उनमें पर पीड़ा दूर करने और असहाय लोगों की मदद करने की भावना और अधिक मजबूत हुई है।

राज्य आनंद संस्थान के सलाहकार सत्य प्रकाश आर्य ने कहा कि ऑनलाइन अल्पविराम कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरात्मा से संवाद स्थापित करने का है आत्मा की आवाज सुनना और अनुसरण करना यह टूल सिर्फ आप और आपके लिए है। प्रदेश में अन्य  टीमों का कोआर्डिनेशन कर रहे कटनी से राजेंद्र असाटी शिवपुरी से प्रेम प्रकाश सिरोलिया के साथ राज्य आनंद संस्थान के हिमांशु भारत, प्रदीप महतों, मुकेश करूंआ भी समीक्षा कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

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