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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

छतरपुर - ऑनलाइन अल्पविराम का दूसरा चरण 13 मई से



कोरोना महामारी की चिंता से मुक्त कराने हेतु ऑनलाइन अल्पविराम कार्यक्रम के पहले चरण की समाप्ति पर प्राप्त फीडबैक से संतुष्ट राज्य आनंद संस्थान के सीईओ अखिलेश कुमार अर्गल ने 13 मई से दूसरा चरण प्रारंभ किए जाने का निर्णय लिया है पूरे प्रदेश में गठित पांच टीमें 6-6 दिनों तक पुनः अल्पविराम कार्यक्रमों को संचालित करेंगी। प्रत्येक टीम के साथ 40 प्रतिभागी ऑनलाइन पंजीयन करा सकेंगे।
छतरपुर से मास्टर ट्रेनर लखनलाल असाटी ने आशा असाटी, देवास की प्रा.े समीरा नईम, दमोह के रमेश व्यास व उषा व्यास के साथ एक टीम का कोऑर्डिनेशन किया है। इस टीम के साथ अल्पविराम ले रही देवास की हेमलता सक्सेना ने बताया कि उनकी भाभी प्रीति सक्सेना अरविंदो हॉस्पिटल इंदौर से कोरोना की जंग जीतकर कल ही वापस घर लौटी हैं। 15 अप्रैल से अस्पताल में उनकी स्थिति क्रिटिकल थी पर पूरे परिवार को अल्पविराम ने बहुत बड़ी ताकत दी, भिंड के प्रशांत भदौरिया ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों पर गुस्सा करना कम कर दिया है और सकारात्मकता बढ़ाने के लिए जिम्मेदारियां लेना शुरू की हैं, शिवपुरी के प्रवीण श्रीवास्तव व शाजापुर के नरेंद्र राजपूत ने भी गुस्से पर नियंत्रण पाने की बात कही।

 उज्जैन की गणित प्रोफेसर डॉ सुमन जैन ने कहा कि अब मेरा ध्यान सामने वाले की कमियों की जगह अच्छाइयों पर जाने लगा है, सीहोर के महेंद्र तोमर ने कहा कि उन्हें इस बात से छुटकारा मिल गया है कि सामने वाला उनकी तरह क्यों नहीं सोचता है। इंदौर एसजीआईटीएस इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रो. विवेक तिवारी ने कहा कि अब तक रिश्तो में जटिलता रहती थी पर अब मनरूस्थिति शांत हुई है, संतोष मिला है कार्यक्षेत्र व घर दोनों में इसका ध्यान रखेंगे। सतना जिले के मझगवां निवासी बृजेंद्र सिंह ने कहा कि वह अब तक अपने आप को बड़ा समाजसेवी समझते थे पर 6 दिनों के अल्पविराम में उनका यह भ्रम टूट गया है अब उन्हें अन्य लोगों द्वारा की जा रही सेवाएं अपने से अधिक श्रेष्ठ लगती हैं। भोपाल के मुकेश गर्ग ने कहा कि उनमें पर पीड़ा दूर करने और असहाय लोगों की मदद करने की भावना और अधिक मजबूत हुई है।

राज्य आनंद संस्थान के सलाहकार सत्य प्रकाश आर्य ने कहा कि ऑनलाइन अल्पविराम कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरात्मा से संवाद स्थापित करने का है आत्मा की आवाज सुनना और अनुसरण करना यह टूल सिर्फ आप और आपके लिए है। प्रदेश में अन्य  टीमों का कोआर्डिनेशन कर रहे कटनी से राजेंद्र असाटी शिवपुरी से प्रेम प्रकाश सिरोलिया के साथ राज्य आनंद संस्थान के हिमांशु भारत, प्रदीप महतों, मुकेश करूंआ भी समीक्षा कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

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