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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

छतरपुर - श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन से प्रवासी मजदूरों की हुई घर वापसी


वैश्विक महामारी कोविड-19 के संक्रमण काल में लॉकडाउन के दौरान हरियाणा में फंसे प्रवासी मजदूरों की रविवार की सुबह घर वापसी हो गई है। रेल मंत्रालय ने श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन द्वारा 1343 प्रवासी मजदूरों को रेवाड़ी रेल्वे स्टेशन से 8 मई को रात्रि में छतरपुर रेल्वे स्टेशन के लिए रवाना किया था।

ट्रेन के सुबह रेल्वे स्टेशन छतरपुर पहुंचने पर प्रवासी मजदूरों की स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और रजिस्ट्रेशन करने के बाद बस द्वारा नाश्ता, खाना और पेयजल की व्यवस्था के साथ रवाना किया गया। छतरपुर जिले के 1305 मजदूर वापस आए
श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन से आज सुबह छतरपुर जिले के 1305 और अन्य जिलों के 38 प्रवासी मजदूर वापस पहुंचे हैं। प्रशासन द्वारा मजदूरों को बसों के जरिए उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया। बिजावर के 286, बड़ामलहरा के 193,  नौगांव और  महाराजपुर के 64-64, राजनगर के 105, चंदला के 68, लवकुशनगर के 180, बक्स्वाहा के 16, घुवारा के 101, गौरिहार के 83 और 145 स्थानीय प्रवासी मजदूरों को घर भेजा गया।उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा मजदूरों के आगमन और सुविधा के दृष्टिगत छतरपुर रेल्वे स्टेशन में अधिकारियों की जिम्मेवारी तय कर ड्यूटी लगाई गई थी।

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