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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

मदर्स डे स्पेशल स्टोरी - एक तरफ सरकारी नॉकरी का कर्तव्य तो दूसरी ओर माँ होने का फर्ज निभा रही हैं सुनिता रणदिवे

किसी ने सच ही कहा है कि भगवान हर जगह मौजूद नहीं रह सकते इसलिए उन्होंने मां को बनाया है. मां भगवान का बनाया गया सबसे नायाब तोहफा है यह दिन सभी मांओं को समर्पित होता है हर व्यक्ति के जीवन में मां वो महिला होती है जिससे वो अपने मन की सभी बाते शेयर करते हैं. और अगर मां की बात करें तो उसका बच्चा दुनिया वालों के लिए कितना भी बुरा क्यों ना हो उसे वह सबसे प्यारा होता है शायद इसलिए मां की ममता को शायद कोई नहीं समझ सकता  
आज मदर्स डे है और हम बात कर रहे है सुनीता रणदिवे की जो जबलपुर के चरगवां क्षेत्र के बिजौरी उप स्वास्थ्य केन्द्र में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर के पद पर पदस्थ है इन दिनों सुनीता अपने 10 माह के बच्चे को लेकर बखूबी अपनी सरकारी नॉकरी का कर्तव्य ओर दूसरी ओर माँ होने का फर्ज दोनों निभा रही हैं।सुनीता ने बताया कि उनका जन्म बालाघाट के लांजी में हुआ था। जहाँ गरीब परस्थितियों पढ़ाई करने के बाद अनेकों जगह इंटरव्यू एग्जाम दिए लेकिन नॉकरी नही लगी। लेकिन इसके बाद भी सुनीता हार नही मानी।ओर 2011 में किस्मत की लॉटरी आखिर खुल ही गई। जंहा पहली पोस्टिंग उमरिया जिले की जिला अस्पताल में नर्स के पद पर पदस्थ हुई थी। नॉकरी लगने के कुछ महीने बाद ही सुनीता की शादी मेडिकल कॉलेज जबलपुर सेंट्रल लेब में पदस्थ सुरेश रणदिवे के साथ हुई। वही पांच साल वीत जाने के बाद सुनीता का ट्रांसफर जबलपुर के चरगवां स्वास्थ्य में हो गया इसके बाद शहर के अन्य जगह सेवाए दी है विगत चार माह से सुनीता चरगवां के बिजौरी उप स्वास्थ्य केंद्र में सेवाए दे रही है।वही सुनीता के दो बच्चे है पहला बच्चा चार साल का ओर वहीं दूसरा बच्चा 10 माह का है जो के बिजौरी में माँ के साथ ही रहता है कोरोना इस आपदा की घड़ी में लोग परेशान ना हो उन्हें उचित इलाज मिले इसलिए महिला डॉक्टर पूरी ईमानदारी कर कर्तव्यनिष्ठा से दिन रात अस्पताल में रहकर अपनी ड्यूटी कर रही है महिला
डॉ का कहना है लोगों की सेवा करना पुण्य का काम है वह लगातार अपने बच्चे और ग्रामीणों की देखभाल के लिए सेवा कर रही हैं इससे पहले शहर के विभिन्न निजी अस्पतालों में सेवाएं दे चुकी तब जब कि देश महामारी को झेल रहा है, इस महिला डॉक्टर को लगता है कि यह समय सभी माताओं के लिए सिर्फ जिम्मेदार माता बनने का नहीं बल्कि जिम्मेदार नागरिक बनने के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने का समय है. वह कहती हैं, "मुझे लगता है कि हमारे आसपास के परिदृश्य को देखते हुए यह माना जाता है कि सभी माताएं सिर्फ जिम्मेदार मां नहीं हैं, बल्कि ज़िम्मेदार नागरिक भी हैं. वे बच्चों को ज़िम्मेदार नागरिक बनना सिखाती हैं और राष्ट्र के लिए यह काम करती हैं."


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