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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

छतरपुर में अतिथि शिक्षक भर्ती घोटाले में 19 शिक्षकों पर मामला दर्ज,मचा हड़कंप


राजनगर थाना में पूर्व शिक्षा अधिकारी एम के त्रिपाठी समेत 19 शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज, न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई

छतरपुर (राजनगर)। जिले के राजनगर में 2018 में हुए अतिथि शिक्षक भर्ती घोटाले में पुलिस ने 19 शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस मामले में राजनगर विकासखंड के पूर्व शिक्षा अधिकारी एम के त्रिपाठी भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता रविंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि इस भर्ती में कई पात्रता वाले उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर फर्जी तरीके से भर्ती की गई थी।

शिकायतकर्ता रविंद्र मिश्रा के अनुसार, 2018 में हुई भर्ती में बिना किसी सही प्रक्रिया के शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। मिश्रा ने इस घोटाले की शिकायत विभागीय अधिकारियों से की थी, और विभागीय जांच में यह आरोप सही पाए गए थे। हालांकि, जांच के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद उन्होंने मामला राजनगर न्यायालय में दायर किया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को आदेश दिया और उसके बाद राजनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। 

इस घोटाले ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। क्या भविष्य में इस तरह के घोटालों से बचने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे इस मामले में न्यायालय के आदेश से ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, जो कि विभागीय जांच के बाद ठंडे बस्ते में चला गया था। अब देखना यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।

यह घोटाला शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और ईमानदारी पर सवाल खड़ा करता है। अब जब मामला न्यायालय में पहुंच चुका है, तो उम्मीद की जा रही है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से शिक्षा विभाग को सीखने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटाले न हो सकें।

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