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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

छतरपुर में अतिथि शिक्षक भर्ती घोटाले में 19 शिक्षकों पर मामला दर्ज,मचा हड़कंप


राजनगर थाना में पूर्व शिक्षा अधिकारी एम के त्रिपाठी समेत 19 शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज, न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई

छतरपुर (राजनगर)। जिले के राजनगर में 2018 में हुए अतिथि शिक्षक भर्ती घोटाले में पुलिस ने 19 शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस मामले में राजनगर विकासखंड के पूर्व शिक्षा अधिकारी एम के त्रिपाठी भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता रविंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि इस भर्ती में कई पात्रता वाले उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर फर्जी तरीके से भर्ती की गई थी।

शिकायतकर्ता रविंद्र मिश्रा के अनुसार, 2018 में हुई भर्ती में बिना किसी सही प्रक्रिया के शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। मिश्रा ने इस घोटाले की शिकायत विभागीय अधिकारियों से की थी, और विभागीय जांच में यह आरोप सही पाए गए थे। हालांकि, जांच के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद उन्होंने मामला राजनगर न्यायालय में दायर किया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को आदेश दिया और उसके बाद राजनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। 

इस घोटाले ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। क्या भविष्य में इस तरह के घोटालों से बचने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे इस मामले में न्यायालय के आदेश से ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, जो कि विभागीय जांच के बाद ठंडे बस्ते में चला गया था। अब देखना यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।

यह घोटाला शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और ईमानदारी पर सवाल खड़ा करता है। अब जब मामला न्यायालय में पहुंच चुका है, तो उम्मीद की जा रही है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से शिक्षा विभाग को सीखने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटाले न हो सकें।

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