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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

छतरपुर में अतिथि शिक्षक भर्ती घोटाले में 19 शिक्षकों पर मामला दर्ज,मचा हड़कंप


राजनगर थाना में पूर्व शिक्षा अधिकारी एम के त्रिपाठी समेत 19 शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज, न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई

छतरपुर (राजनगर)। जिले के राजनगर में 2018 में हुए अतिथि शिक्षक भर्ती घोटाले में पुलिस ने 19 शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस मामले में राजनगर विकासखंड के पूर्व शिक्षा अधिकारी एम के त्रिपाठी भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता रविंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि इस भर्ती में कई पात्रता वाले उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर फर्जी तरीके से भर्ती की गई थी।

शिकायतकर्ता रविंद्र मिश्रा के अनुसार, 2018 में हुई भर्ती में बिना किसी सही प्रक्रिया के शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। मिश्रा ने इस घोटाले की शिकायत विभागीय अधिकारियों से की थी, और विभागीय जांच में यह आरोप सही पाए गए थे। हालांकि, जांच के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद उन्होंने मामला राजनगर न्यायालय में दायर किया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को आदेश दिया और उसके बाद राजनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। 

इस घोटाले ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। क्या भविष्य में इस तरह के घोटालों से बचने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे इस मामले में न्यायालय के आदेश से ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, जो कि विभागीय जांच के बाद ठंडे बस्ते में चला गया था। अब देखना यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।

यह घोटाला शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और ईमानदारी पर सवाल खड़ा करता है। अब जब मामला न्यायालय में पहुंच चुका है, तो उम्मीद की जा रही है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से शिक्षा विभाग को सीखने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटाले न हो सकें।

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