Skip to main content

BREAKING NEWS

मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

छतरपुर में अतिथि शिक्षक भर्ती घोटाले में 19 शिक्षकों पर मामला दर्ज,मचा हड़कंप


राजनगर थाना में पूर्व शिक्षा अधिकारी एम के त्रिपाठी समेत 19 शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज, न्यायालय के आदेश पर हुई कार्रवाई

छतरपुर (राजनगर)। जिले के राजनगर में 2018 में हुए अतिथि शिक्षक भर्ती घोटाले में पुलिस ने 19 शिक्षकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस मामले में राजनगर विकासखंड के पूर्व शिक्षा अधिकारी एम के त्रिपाठी भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता रविंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया कि इस भर्ती में कई पात्रता वाले उम्मीदवारों को नजरअंदाज कर फर्जी तरीके से भर्ती की गई थी।

शिकायतकर्ता रविंद्र मिश्रा के अनुसार, 2018 में हुई भर्ती में बिना किसी सही प्रक्रिया के शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। मिश्रा ने इस घोटाले की शिकायत विभागीय अधिकारियों से की थी, और विभागीय जांच में यह आरोप सही पाए गए थे। हालांकि, जांच के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद उन्होंने मामला राजनगर न्यायालय में दायर किया। न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को आदेश दिया और उसके बाद राजनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। 

इस घोटाले ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। क्या भविष्य में इस तरह के घोटालों से बचने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे इस मामले में न्यायालय के आदेश से ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की, जो कि विभागीय जांच के बाद ठंडे बस्ते में चला गया था। अब देखना यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।

यह घोटाला शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और ईमानदारी पर सवाल खड़ा करता है। अब जब मामला न्यायालय में पहुंच चुका है, तो उम्मीद की जा रही है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना से शिक्षा विभाग को सीखने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह के घोटाले न हो सकें।

Comments