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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

बागेश्वर धाम के पास रेलवे स्टेशन का नाम बदलने पर विवाद,रेलवे ने नाम बदला,लेकिन आस्था पर सवाल छोड़ गए !

हिंदू आस्था पर प्रहार

बागेश्वर धाम के पास गंज में स्थित रेलवे स्टेशन के नाम में बदलाव को लेकर विवाद उठ गया है। पहले "दुरिया गंज" नाम था, जिसे अब "दरिया गंज" कर दिया गया है। इस बदलाव पर स्थानीय लोगों की नाराजगी सामने आई है, जिन्होंने इसे एक इस्लामिक नाम रखने की साजिश के रूप में देखा है। लोग कहते हैं कि अगर नाम बदलना ही था तो इसे "बागेश्वर धाम" के नाम पर रखा जाना चाहिए था, ताकि धार्मिक महत्व को ध्यान में रखा जा सके। न केवल नाम परिवर्तन को लेकर आपत्ति उठी है, बल्कि अब रेलवे स्टेशन के नाम को हिन्दी और इंग्लिश के साथ उर्दू में भी लिखा गया है, जिससे विवाद और बढ़ गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और खजुराहो सांसद को स्थानीय लोगों ने इस मुद्दे पर एक खत भी लिखा है। 
इस विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जिसमें कुछ लोग इसे हिंदू आस्था पर चोट मान रहे हैं

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