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हर साल रावण जलता है,फिर भी समाज में रावण जिंदा क्यों है ?

दशहरा केवल पुतला दहन का पर्व नहीं,बल्कि अपने भीतर और समाज में मौजूद बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेने का अवसर है हर साल दशहरे पर देशभर में रावण के पुतले जलाए जाते हैं। मैदानों में हजारों लोगों की भीड़ जुटती है, आतिशबाजी होती है,जयकारे गूंजते हैं और सत्य की विजय तथा अधर्म के विनाश का संदेश दिया जाता है। यह परंपरा हमारी संस्कृति,आस्था और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों से जुड़ी हुई है। रावण का दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। लेकिन हर साल मन में एक सवाल उठता है कि जब हम सदियों से रावण का दहन करते आ रहे हैं,तो समाज में बुराइयां आज भी क्यों मौजूद हैं ? आखिर वह कौन-सा रावण है,जो हर साल पुतले के रूप में जल जाता है, लेकिन अगले दिन फिर हमारे आसपास दिखाई देने लगता है ? दरअसल,रावण केवल रामायण का एक पात्र नहीं,बल्कि अहंकार,अन्याय,सत्ता के दुरुपयोग और दूसरे की मर्यादा का अपमान करने जैसी बुराइयों का प्रतीक भी है। दशहरा हमें इन बुराइयों के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा देता है। लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि हमने इस पर्व के वास्तविक संदेश को केवल एक आयोजन तक ...

बागेश्वर धाम के पास रेलवे स्टेशन का नाम बदलने पर विवाद,रेलवे ने नाम बदला,लेकिन आस्था पर सवाल छोड़ गए !

हिंदू आस्था पर प्रहार

बागेश्वर धाम के पास गंज में स्थित रेलवे स्टेशन के नाम में बदलाव को लेकर विवाद उठ गया है। पहले "दुरिया गंज" नाम था, जिसे अब "दरिया गंज" कर दिया गया है। इस बदलाव पर स्थानीय लोगों की नाराजगी सामने आई है, जिन्होंने इसे एक इस्लामिक नाम रखने की साजिश के रूप में देखा है। लोग कहते हैं कि अगर नाम बदलना ही था तो इसे "बागेश्वर धाम" के नाम पर रखा जाना चाहिए था, ताकि धार्मिक महत्व को ध्यान में रखा जा सके। न केवल नाम परिवर्तन को लेकर आपत्ति उठी है, बल्कि अब रेलवे स्टेशन के नाम को हिन्दी और इंग्लिश के साथ उर्दू में भी लिखा गया है, जिससे विवाद और बढ़ गया है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और खजुराहो सांसद को स्थानीय लोगों ने इस मुद्दे पर एक खत भी लिखा है। 
इस विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जिसमें कुछ लोग इसे हिंदू आस्था पर चोट मान रहे हैं

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