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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

छतरपुर में रक्षक ही बने भक्षक: जंगल की सुरक्षा करने वाले अब सागौन लकड़ी की तस्करी में लिप्त

छतरपुर, मध्य प्रदेश: जंगल की रक्षा करने वाले अब स्वयं जंगल के सबसे बड़े शत्रु बन गए हैं। छतरपुर जिले के बसारी सर्कल में पदस्थ डिप्टी रेंजर रवि खरे के खिलाफ बेशकीमती सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई और तस्करी के आरोप सामने आए हैं। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि क्या प्रशासनिक तंत्र में मौजूद भ्रष्ट तत्व जंगलों की सुरक्षा के नाम पर सिर्फ अपनी तिजोरी भरने में जुटे हुए हैं।

वायरल हुआ वीडियो और ऑडियो

जानकारी के मुताबिक, ओंटा पुरवा के जंगल में सागौन के हजारों पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की गई। इस घटना का वीडियो और डिप्टी रेंजर का ऑडियो भी वायरल हो गया है, जिसमें तस्करी से जुड़े माफिया से मिलकर सागौन लकड़ी की कटाई करने की बात की जा रही है। यह ऑडियो जंगल में हो रही अवैध कटाई को प्रमाणित करता है और प्रशासन के खिलाफ गंभीर सवाल खड़े करता है।

बेशकीमती सागौन की तस्करी का पर्दाफाश

जंगल की सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाले रेंजर और उनके सहयोगी अब सागौन के बेशकीमती पेड़ों की अवैध कटाई में संलिप्त पाए गए हैं। सागौन की लकड़ी की तस्करी एक बड़ा काले बाजार बन चुकी है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही है और सरकार की वन नीति को भी चोट पहुँचा रही है।

प्रशासनिक कार्रवाई की मांग

इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद स्थानीय निवासियों और वन्यजीव सुरक्षा कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि इस तरह के भ्रष्टाचार और तस्करी के मामलों से न केवल जंगलों का नाश हो रहा है, बल्कि इनकी सुरक्षा में लगे जिम्मेदारों का विश्वास भी उठ रहा है।

क्या प्रशासन इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेगा और जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा? यह सवाल अब जंगल और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर गंभीर चुनौती खड़ा करता है।


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