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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

मकर संक्रांति पर्व पर कैन नदी के टोरिया घाट पर आस्था की डुबकी,भव्य मेले का आयोजन

14 जनवरी 2025 

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पन्ना जिले के टाइगर रिजर्व के पास स्थित केन नदी के टोरिया घाट पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखा गया। इस दिन भक्तों ने नदी में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया और साथ ही तिली के लड्डू का प्रसाद ग्रहण किया। मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष खास रूप से मनाया जाता है, केन नदी किनारे बसे धमना पंचायत के टोरिया गांव में भव्य मेले का आयोजन भी किया जा रहा है।

आस्था की डुबकी और धार्मिक आयोजन

सुबह से ही टोरिया घाट पर भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गईं। पवित्र जल में डुबकी लगाकर लोग सूर्य देवता की आराधना कर रहे थे, ताकि उनका जीवन सुख, समृद्धि और शांति से परिपूर्ण हो। इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का होता है, जिसे शुभ और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है। भक्तों ने यहां नदी में स्नान करने के बाद तिल और गुड़ से बने लड्डू खाए, जो इस दिन का पारंपरिक प्रसाद है।

धमना पंचायत के टोरिया गांव में मेला

मकर संक्रांति के इस शुभ अवसर पर धमना पंचायत के टोरिया गांव में एक भव्य मेला आयोजित किया गया जा रहा है, जिसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। मेले में तिल, गुड़, लड्डू, पतंग और अन्य पारंपरिक वस्तुओं की दुकानें लगाई गई। इस मेले में धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। 

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका

प्रशासन ने मेले और घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि लोगों को कोई कठिनाई न हो और सभी भक्त शांति से अपना धार्मिक कार्य पूरा कर सकें। साथ ही, घाट पर सफाई और जल स्तर की निगरानी रखने के लिए भी विशेष ध्यान दिया गया।

प्रकृति और आस्था का संगम

केन नदी के किनारे बसे इस छोटे से गांव में मकर संक्रांति का पर्व आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद खास मनाया जाता है। घाट पर डुबकी लगाने के बाद लोग न केवल धार्मिक शांति का अनुभव करते हैं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद लेते नजर आए। 

समाज में एकता का प्रतीक
मकर संक्रांति के इस पर्व ने छतरपुर जिले के टोरिया गांव और आसपास के इलाकों में एकता और भाईचारे का संदेश दिया जाता है। लोग अलग-अलग जाति, धर्म और समुदाय से होकर एक ही स्थान पर एकत्र होते हैं, जो इस पर्व की सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। यहाँ की परंपराएँ और स्थानीय संस्कृति आज भी लोगों के दिलों में गहरी बसी हुई हैं।


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