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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

मकर संक्रांति पर्व पर कैन नदी के टोरिया घाट पर आस्था की डुबकी,भव्य मेले का आयोजन

14 जनवरी 2025 

मकर संक्रांति के पावन अवसर पर पन्ना जिले के टाइगर रिजर्व के पास स्थित केन नदी के टोरिया घाट पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखा गया। इस दिन भक्तों ने नदी में डुबकी लगाकर पुण्य कमाया और साथ ही तिली के लड्डू का प्रसाद ग्रहण किया। मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष खास रूप से मनाया जाता है, केन नदी किनारे बसे धमना पंचायत के टोरिया गांव में भव्य मेले का आयोजन भी किया जा रहा है।

आस्था की डुबकी और धार्मिक आयोजन

सुबह से ही टोरिया घाट पर भक्तों की कतारें लगनी शुरू हो गईं। पवित्र जल में डुबकी लगाकर लोग सूर्य देवता की आराधना कर रहे थे, ताकि उनका जीवन सुख, समृद्धि और शांति से परिपूर्ण हो। इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का होता है, जिसे शुभ और नए आरंभ का प्रतीक माना जाता है। भक्तों ने यहां नदी में स्नान करने के बाद तिल और गुड़ से बने लड्डू खाए, जो इस दिन का पारंपरिक प्रसाद है।

धमना पंचायत के टोरिया गांव में मेला

मकर संक्रांति के इस शुभ अवसर पर धमना पंचायत के टोरिया गांव में एक भव्य मेला आयोजित किया गया जा रहा है, जिसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे। मेले में तिल, गुड़, लड्डू, पतंग और अन्य पारंपरिक वस्तुओं की दुकानें लगाई गई। इस मेले में धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है। 

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका

प्रशासन ने मेले और घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सुनिश्चित किया कि लोगों को कोई कठिनाई न हो और सभी भक्त शांति से अपना धार्मिक कार्य पूरा कर सकें। साथ ही, घाट पर सफाई और जल स्तर की निगरानी रखने के लिए भी विशेष ध्यान दिया गया।

प्रकृति और आस्था का संगम

केन नदी के किनारे बसे इस छोटे से गांव में मकर संक्रांति का पर्व आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद खास मनाया जाता है। घाट पर डुबकी लगाने के बाद लोग न केवल धार्मिक शांति का अनुभव करते हैं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद लेते नजर आए। 

समाज में एकता का प्रतीक
मकर संक्रांति के इस पर्व ने छतरपुर जिले के टोरिया गांव और आसपास के इलाकों में एकता और भाईचारे का संदेश दिया जाता है। लोग अलग-अलग जाति, धर्म और समुदाय से होकर एक ही स्थान पर एकत्र होते हैं, जो इस पर्व की सुंदरता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है। यहाँ की परंपराएँ और स्थानीय संस्कृति आज भी लोगों के दिलों में गहरी बसी हुई हैं।


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