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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

मजदूरों की जान के साथ खिलवाड़ बिना सेफ्टी किट काम करते मजदूर

ललितपुर, खजुराहो, और सिंगरौली रेलवे लाइन निर्माण में ठेकेदारों द्वारा मजदूरों की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है। जे.के.सी कंपनी द्वारा कराए जा रहे इस रेलवे प्रोजेक्ट में सेफ्टी किट का पूरी तरह से अभाव है, और मजदूर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के काम कर रहे हैं। 

मजदूरों की स्थिति
इन मजदूरों में कई बच्चे भी शामिल हैं, जिनका काम करना गंभीर चिंता का विषय है। दर्जनों नाबालिक बच्चे कैमरे में काम करते हुए पकड़े गए हैं। ये बच्चे और बड़े, दोनों ही बिना हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट या अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरणों के काम कर रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या ठेकेदारों द्वारा इनकी सुरक्षा की कोई चिंता नही है ?

ठेकेदारों की मनमानी
यह घटना दर्शाती है कि किस प्रकार ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके काम को किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है। यह बिंदु महत्वपूर्ण है कि आखिरकार किसके संरक्षण में यह ठेकेदार अपनी मनमानी कर रहे हैं और मजदूरों की जान को खतरे में डाल रहे हैं। 

कंपनी पर उठ रहे सवाल
जे.के.सी कंपनी की ओर से इस प्रोजेक्ट के कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है, जिससे यह प्रश्न उठता है कि कंपनी के ऊपर कोई निगरानी क्यों नहीं रखी जा रही ? मजदूरों की सुरक्षा को लेकर यह स्थिति स्पष्ट रूप से खतरनाक है। इस मामले पर सरकार और संबंधित अधिकारियों को जांच और सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुर्घटनाओं से बचा जा सके और मजदूरों को उचित सुरक्षा मिल सके।

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