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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

खेतों से मोटर चोरी,किसानों में हड़कंप,बमीठा थाना क्षेत्र टोरिया गांव की घटना,जांच में जुटी पुलिस


छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र स्थित टोरिया गांव में चोरों ने किसानों के खेतों से मोटर चोरी की। इस घटना ने किसानों के बीच खलबली मचा दी है और उनकी चिंता बढ़ा दी है। टोरिया गांव के निवासी सूजन सिंह यादव ने बताया कि उनके खेत से भी मोटर चोरी हुई है, जिससे उनकी खेती की पानी की व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। 

सूजन सिंह के मुताबिक, उनकी तरह गांव के अन्य कई किसानों के खेतों से भी मोटर चोरी हो गई है। इस प्रकार की चोरी से किसानों की खेती में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है, क्योंकि खेतों में पानी की व्यवस्था के लिए इन मोटरों का इस्तेमाल किया जाता है। अब बिना मोटर के किसानों के लिए अपनी फसलों को पानी देना मुश्किल हो गया है। 

घटना के बाद किसानों ने चंद्रनगर चौकी में अपनी शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस से जल्द कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन चोरी की यह घटना किसानों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। 

किसानों का कहना है कि यदि जल्दी ही मोटर वापस नहीं मिलती या चोरों पर कार्रवाई नहीं होती, तो उनकी फसलें बर्बाद हो सकती हैं और उनका आर्थिक संकट और बढ़ सकता है। 

अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक कार्रवाई करता है और किसानों को न्याय दिलाने में सफल होता है।

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