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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

खजुराहो बेनी सागर डैम पार्क: पर्यटन विभाग का 'चमकता' सपना,अब जंग और गंदगी में खो गया ?

कहते हैं, "पैसे का कुछ नहीं होता, पर जब खर्च हो जाए तो समझ आता है!" कुछ ऐसा ही हुआ है मध्य प्रदेश के खजुराहो के पास बने बेनी सागर डैम के पार्क के साथ। पर्यटन विभाग ने लाखों रुपये उड़ाए थे, ताकि इस पार्क में पर्यटकों का हुजूम लगे, मगर अब यह पार्क एकदम से उदास और भूतिया सा लगता है।

यहाँ तक कि, जिस पुराने ट्रेन इंजन को पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रखा गया था, वह भी अब अपना "मूड" नहीं बना पा रहा है। जंग ने उसे इस तरह घेर लिया है कि अब वह ट्रेन कम, "झंझट इंजन" ज्यादा लगता है। अब ये इंजन ऐसा लगता है जैसे उसकी जिंदगी की बुरी तारीखें शुरू हो गई हों।

फिर भी, बड़े सवाल उठ रहे हैं— आखिर इस पार्क का निर्माण क्यों किया गया था ? क्या यह पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए था या बस किसी को दिखाने के लिए कि हम भी कुछ कर सकते हैं ?

अब सवाल उठता है कि जब पार्क बनाते समय लाखों रुपये खर्च किए गए थे, तो रख-रखाव पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया ? क्या यह सिर्फ इसलिए था कि पार्क का निर्माण सिर्फ फोटोशूट करके शासन से राशि का गवान  करना था

बेनी सागर डैम पार्क का वर्तमान हालत देखकर यह लगता है कि यहाँ सिर्फ पैसा खर्च हुआ है, परंतु देखभाल की कोई योजना नहीं बनी। यह पार्क अब एक काव्यात्मक उदाहरण बन चुका है कि "जंग लगने से पहले क्या कोई भी चीज़ कभी चमक सकती है?" अगर इस पार्क को ठीक से संभाला गया होता, तो शायद आज यह पर्यटकों के बीच एक स्पॉट बन चुका होता। लेकिन फिलहाल तो यह अपनी जंग खाती ट्रेन और बस एक हंसी का कारण बन कर रह गया है!


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