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केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?
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SAMEER AWASTHI
खजुराहो बेनी सागर डैम पार्क: पर्यटन विभाग का 'चमकता' सपना,अब जंग और गंदगी में खो गया ?
कहते हैं, "पैसे का कुछ नहीं होता, पर जब खर्च हो जाए तो समझ आता है!" कुछ ऐसा ही हुआ है मध्य प्रदेश के खजुराहो के पास बने बेनी सागर डैम के पार्क के साथ। पर्यटन विभाग ने लाखों रुपये उड़ाए थे, ताकि इस पार्क में पर्यटकों का हुजूम लगे, मगर अब यह पार्क एकदम से उदास और भूतिया सा लगता है।
यहाँ तक कि, जिस पुराने ट्रेन इंजन को पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए रखा गया था, वह भी अब अपना "मूड" नहीं बना पा रहा है। जंग ने उसे इस तरह घेर लिया है कि अब वह ट्रेन कम, "झंझट इंजन" ज्यादा लगता है। अब ये इंजन ऐसा लगता है जैसे उसकी जिंदगी की बुरी तारीखें शुरू हो गई हों।
फिर भी, बड़े सवाल उठ रहे हैं— आखिर इस पार्क का निर्माण क्यों किया गया था ? क्या यह पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए था या बस किसी को दिखाने के लिए कि हम भी कुछ कर सकते हैं ?
अब सवाल उठता है कि जब पार्क बनाते समय लाखों रुपये खर्च किए गए थे, तो रख-रखाव पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया ? क्या यह सिर्फ इसलिए था कि पार्क का निर्माण सिर्फ फोटोशूट करके शासन से राशि का गवान करना था बेनी सागर डैम पार्क का वर्तमान हालत देखकर यह लगता है कि यहाँ सिर्फ पैसा खर्च हुआ है, परंतु देखभाल की कोई योजना नहीं बनी। यह पार्क अब एक काव्यात्मक उदाहरण बन चुका है कि "जंग लगने से पहले क्या कोई भी चीज़ कभी चमक सकती है?" अगर इस पार्क को ठीक से संभाला गया होता, तो शायद आज यह पर्यटकों के बीच एक स्पॉट बन चुका होता। लेकिन फिलहाल तो यह अपनी जंग खाती ट्रेन और बस एक हंसी का कारण बन कर रह गया है!- Get link
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