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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

छतरपुर में 48 लाख का पंचायत घोटाला सरपंच,सचिव और रोजगार सहायक पर FIR सरपंच ने अपने ही घर के नौकर के खाते में करवा डाला लाखों का फर्जी भुगतान


नौकर के खाते में पहुंचाए लाखों, जिला पंचायत सीईओ के आदेश पर दर्ज हुआ मामला, सचिव निलंबित – रोजगार सहायक जनपद अटैच
छतरपुर : राजनगर जनपद के ग्राम पंचायत चौबर में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। पंचायत की सरपंच श्रीमती प्रेमकुवर सिंह, पंचायत सचिव प्रकाशचंद्र पटेल और रोजगार सहायक ओमप्रकाश दुबे पर 48 लाख रुपए से अधिक का फर्जी भुगतान करने का आरोप साबित होने के बाद जिला सीईओ के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
जांच में यह चौकाने वाला खुलासा हुआ कि सरपंच ने विकास कार्यों के नाम पर अपने ही घर के नौकर साथीराम के बैंक खाते में लाखों रुपए का भुगतान करवा दिया। इससे ग्राम पंचायत के कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला पंचायत सीईओ के आदेश पर पूरा मामला राजनगर थाने पहुंचा और थाने की पुलिस ने तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
कार्रवाई के तहत पंचायत सचिव प्रकाशचंद्र पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, वहीं रोजगार सहायक ओमप्रकाश दुबे को जनपद कार्यालय अटैच किया गया है। मामले की जांच जारी है।

ग्राम पंचायत चौबर में हुए इस भ्रष्टाचार कांड ने न केवल ग्रामीणों बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी हड़कंप मचा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर मिलने वाला पैसा अगर जिम्मेदार लोग ही हड़प जाएं तो गांव की हालत कैसे सुधरेगी?

अब पुलिस जांच से यह देखना होगा कि आरोपियों की गिरफ्तारी कब तक होती है और इस घोटाले में कौन-कौन से लोग शामिल हैं और कब तक कड़ी कार्रवाई होती है।

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