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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

छतरपुर में 48 लाख का पंचायत घोटाला सरपंच,सचिव और रोजगार सहायक पर FIR सरपंच ने अपने ही घर के नौकर के खाते में करवा डाला लाखों का फर्जी भुगतान


नौकर के खाते में पहुंचाए लाखों, जिला पंचायत सीईओ के आदेश पर दर्ज हुआ मामला, सचिव निलंबित – रोजगार सहायक जनपद अटैच
छतरपुर : राजनगर जनपद के ग्राम पंचायत चौबर में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। पंचायत की सरपंच श्रीमती प्रेमकुवर सिंह, पंचायत सचिव प्रकाशचंद्र पटेल और रोजगार सहायक ओमप्रकाश दुबे पर 48 लाख रुपए से अधिक का फर्जी भुगतान करने का आरोप साबित होने के बाद जिला सीईओ के आदेश पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
जांच में यह चौकाने वाला खुलासा हुआ कि सरपंच ने विकास कार्यों के नाम पर अपने ही घर के नौकर साथीराम के बैंक खाते में लाखों रुपए का भुगतान करवा दिया। इससे ग्राम पंचायत के कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला पंचायत सीईओ के आदेश पर पूरा मामला राजनगर थाने पहुंचा और थाने की पुलिस ने तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
कार्रवाई के तहत पंचायत सचिव प्रकाशचंद्र पटेल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, वहीं रोजगार सहायक ओमप्रकाश दुबे को जनपद कार्यालय अटैच किया गया है। मामले की जांच जारी है।

ग्राम पंचायत चौबर में हुए इस भ्रष्टाचार कांड ने न केवल ग्रामीणों बल्कि प्रशासनिक स्तर पर भी हड़कंप मचा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास के नाम पर मिलने वाला पैसा अगर जिम्मेदार लोग ही हड़प जाएं तो गांव की हालत कैसे सुधरेगी?

अब पुलिस जांच से यह देखना होगा कि आरोपियों की गिरफ्तारी कब तक होती है और इस घोटाले में कौन-कौन से लोग शामिल हैं और कब तक कड़ी कार्रवाई होती है।

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