Skip to main content

BREAKING NEWS

मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

छतरपुर में वेतन न मिलने से त्रस्त आउटसोर्स कर्मचारी परिवारों पर संकट,सेडमैप की मनमानी पर उठे सवाल

छतरपुर में वेतन न मिलने से स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों का भविष्य अधर में
छतरपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग के लगभग 422 आउटसोर्स कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड पिछले आठ माह से वेतन से वंचित हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इन कर्मचारियों के घर का चूल्हा तक जलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई रुकने की कगार पर है, दुकानदारों ने उधार देना भी बंद कर दिया है। कर्मचारियों की आंखों में बेबसी और घर-परिवार में तनाव साफ झलक रहा है।

इन कर्मचारियों की नियुक्ति भोपाल स्थित संस्था सेडमैप के माध्यम से की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वेतन का भुगतान भी इसी संस्था द्वारा होना था, लेकिन आठ महीने गुजर जाने के बाद भी कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिला।
पूर्व में छतरपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने सेडमैप को पत्र जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि जल्द वेतन नहीं दिया गया तो अनुबंध रद्द कर दिया जाएगा। लेकिन सेडमैप ने आज तक आदेश की अनदेखी की और कर्मचारियों को फूटी कौड़ी तक नहीं दी।
कर्मचारियों का आरोप है कि 1 करोड़ 13 लाख रुपए वेतन भुगतान के लिए सेडमैप को जारी किए जा चुके हैं, इसके बावजूद राशि कर्मचारियों तक नहीं पहुंची। सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों CMHO ने बार-बार आदेश देने के बाद भी संस्था का अनुबंध निरस्त नहीं किया। क्या इस लापरवाही में विभागीय मिलीभगत की बू है?

कर्मचारियों का कहना है कि अगर सेडमैप अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहा तो स्वास्थ्य विभाग को किसी दूसरी संस्था को टेंडर देना चाहिए, ताकि उनका परिवार भूखा न रहे और मेहनत का उचित सम्मान उन्हें मिल सके।

यह मामला सिर्फ वेतन का नहीं बल्कि परिवारों की आजीविका, बच्चों की पढ़ाई और जीवन की गरिमा का सवाल है। कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन से जल्द न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी यह भी सामने आई है कि सेडमैप संस्था को 10% सर्विस चार्ज पर टेंडर जारी किया गया, जबकि स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक सर्विस चार्ज 1 से अधिकतम 10% तक होना चाहिए। ऐसे में शासन को लाखों रुपए की हानि हो रही है और यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर किसकी शह पर सेडमैप को इतनी छूट मिली

Comments