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छतरपुर में विरोध का बदलता स्वरूप चिंताजनक,खाकी का अपमान,समाज का नुकसान

छतरपुर में बिगड़ता माहौल विरोध के नाम पर खाकी से बदसलूकी कब तक ? छतरपुर जिले का माहौल इन दिनों चिंताजनक होता जा रहा है मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला में किसी भी प्रकार का ज्ञापन सौंपना हो या विरोध प्रदर्शन करना हो,कुछ लोग अपनी सीमाएँ लांघते हुए खाकी वर्दी के साथ बदसलूकी पर उतारू हो जाते हैं।  यह स्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि समाज की सोच पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।विरोध करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन उस आवाज में संयम और मर्यादा होना भी उतना ही आवश्यक है।  पुलिसकर्मी हमारी सुरक्षा के लिए तैनात रहते हैं। वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं किसी के बेटे,भाई या पिता हैं। ऐसे में ज्ञापन सौंपते समय या प्रदर्शन के दौरान उनसे अभद्रता करना या खाकी पर हाथ उठाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। खाकी वर्दी व्यवस्था और सुरक्षा का प्रतीक है यदि हम उसी व्यवस्था को कमजोर करने लगेंगे,तो आखिर हमारी मांगें पूरी कैसे होंगी? पुलिस को प्रताड़ित कर, उन्हें उकसा कर या उन पर प्रहार कर हम अपनी ही समस्याओं ...

छतरपुर में वेतन न मिलने से त्रस्त आउटसोर्स कर्मचारी परिवारों पर संकट,सेडमैप की मनमानी पर उठे सवाल

छतरपुर में वेतन न मिलने से स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों का भविष्य अधर में
छतरपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग के लगभग 422 आउटसोर्स कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड पिछले आठ माह से वेतन से वंचित हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इन कर्मचारियों के घर का चूल्हा तक जलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई रुकने की कगार पर है, दुकानदारों ने उधार देना भी बंद कर दिया है। कर्मचारियों की आंखों में बेबसी और घर-परिवार में तनाव साफ झलक रहा है।

इन कर्मचारियों की नियुक्ति भोपाल स्थित संस्था सेडमैप के माध्यम से की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वेतन का भुगतान भी इसी संस्था द्वारा होना था, लेकिन आठ महीने गुजर जाने के बाद भी कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिला।
पूर्व में छतरपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने सेडमैप को पत्र जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि जल्द वेतन नहीं दिया गया तो अनुबंध रद्द कर दिया जाएगा। लेकिन सेडमैप ने आज तक आदेश की अनदेखी की और कर्मचारियों को फूटी कौड़ी तक नहीं दी।
कर्मचारियों का आरोप है कि 1 करोड़ 13 लाख रुपए वेतन भुगतान के लिए सेडमैप को जारी किए जा चुके हैं, इसके बावजूद राशि कर्मचारियों तक नहीं पहुंची। सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों CMHO ने बार-बार आदेश देने के बाद भी संस्था का अनुबंध निरस्त नहीं किया। क्या इस लापरवाही में विभागीय मिलीभगत की बू है?

कर्मचारियों का कहना है कि अगर सेडमैप अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहा तो स्वास्थ्य विभाग को किसी दूसरी संस्था को टेंडर देना चाहिए, ताकि उनका परिवार भूखा न रहे और मेहनत का उचित सम्मान उन्हें मिल सके।

यह मामला सिर्फ वेतन का नहीं बल्कि परिवारों की आजीविका, बच्चों की पढ़ाई और जीवन की गरिमा का सवाल है। कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन से जल्द न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी यह भी सामने आई है कि सेडमैप संस्था को 10% सर्विस चार्ज पर टेंडर जारी किया गया, जबकि स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक सर्विस चार्ज 1 से अधिकतम 10% तक होना चाहिए। ऐसे में शासन को लाखों रुपए की हानि हो रही है और यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर किसकी शह पर सेडमैप को इतनी छूट मिली

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