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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

छतरपुर में वेतन न मिलने से त्रस्त आउटसोर्स कर्मचारी परिवारों पर संकट,सेडमैप की मनमानी पर उठे सवाल

छतरपुर में वेतन न मिलने से स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों का भविष्य अधर में
छतरपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग के लगभग 422 आउटसोर्स कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड पिछले आठ माह से वेतन से वंचित हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इन कर्मचारियों के घर का चूल्हा तक जलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई रुकने की कगार पर है, दुकानदारों ने उधार देना भी बंद कर दिया है। कर्मचारियों की आंखों में बेबसी और घर-परिवार में तनाव साफ झलक रहा है।

इन कर्मचारियों की नियुक्ति भोपाल स्थित संस्था सेडमैप के माध्यम से की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वेतन का भुगतान भी इसी संस्था द्वारा होना था, लेकिन आठ महीने गुजर जाने के बाद भी कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिला।
पूर्व में छतरपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने सेडमैप को पत्र जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि जल्द वेतन नहीं दिया गया तो अनुबंध रद्द कर दिया जाएगा। लेकिन सेडमैप ने आज तक आदेश की अनदेखी की और कर्मचारियों को फूटी कौड़ी तक नहीं दी।
कर्मचारियों का आरोप है कि 1 करोड़ 13 लाख रुपए वेतन भुगतान के लिए सेडमैप को जारी किए जा चुके हैं, इसके बावजूद राशि कर्मचारियों तक नहीं पहुंची। सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों CMHO ने बार-बार आदेश देने के बाद भी संस्था का अनुबंध निरस्त नहीं किया। क्या इस लापरवाही में विभागीय मिलीभगत की बू है?

कर्मचारियों का कहना है कि अगर सेडमैप अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहा तो स्वास्थ्य विभाग को किसी दूसरी संस्था को टेंडर देना चाहिए, ताकि उनका परिवार भूखा न रहे और मेहनत का उचित सम्मान उन्हें मिल सके।

यह मामला सिर्फ वेतन का नहीं बल्कि परिवारों की आजीविका, बच्चों की पढ़ाई और जीवन की गरिमा का सवाल है। कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन से जल्द न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी यह भी सामने आई है कि सेडमैप संस्था को 10% सर्विस चार्ज पर टेंडर जारी किया गया, जबकि स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक सर्विस चार्ज 1 से अधिकतम 10% तक होना चाहिए। ऐसे में शासन को लाखों रुपए की हानि हो रही है और यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर किसकी शह पर सेडमैप को इतनी छूट मिली

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