Skip to main content

BREAKING NEWS

केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

छतरपुर में वेतन न मिलने से त्रस्त आउटसोर्स कर्मचारी परिवारों पर संकट,सेडमैप की मनमानी पर उठे सवाल

छतरपुर में वेतन न मिलने से स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों का भविष्य अधर में
छतरपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग के लगभग 422 आउटसोर्स कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड पिछले आठ माह से वेतन से वंचित हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि इन कर्मचारियों के घर का चूल्हा तक जलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई रुकने की कगार पर है, दुकानदारों ने उधार देना भी बंद कर दिया है। कर्मचारियों की आंखों में बेबसी और घर-परिवार में तनाव साफ झलक रहा है।

इन कर्मचारियों की नियुक्ति भोपाल स्थित संस्था सेडमैप के माध्यम से की गई थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वेतन का भुगतान भी इसी संस्था द्वारा होना था, लेकिन आठ महीने गुजर जाने के बाद भी कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिला।
पूर्व में छतरपुर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने सेडमैप को पत्र जारी कर स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि जल्द वेतन नहीं दिया गया तो अनुबंध रद्द कर दिया जाएगा। लेकिन सेडमैप ने आज तक आदेश की अनदेखी की और कर्मचारियों को फूटी कौड़ी तक नहीं दी।
कर्मचारियों का आरोप है कि 1 करोड़ 13 लाख रुपए वेतन भुगतान के लिए सेडमैप को जारी किए जा चुके हैं, इसके बावजूद राशि कर्मचारियों तक नहीं पहुंची। सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों CMHO ने बार-बार आदेश देने के बाद भी संस्था का अनुबंध निरस्त नहीं किया। क्या इस लापरवाही में विभागीय मिलीभगत की बू है?

कर्मचारियों का कहना है कि अगर सेडमैप अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहा तो स्वास्थ्य विभाग को किसी दूसरी संस्था को टेंडर देना चाहिए, ताकि उनका परिवार भूखा न रहे और मेहनत का उचित सम्मान उन्हें मिल सके।

यह मामला सिर्फ वेतन का नहीं बल्कि परिवारों की आजीविका, बच्चों की पढ़ाई और जीवन की गरिमा का सवाल है। कर्मचारियों ने शासन-प्रशासन से जल्द न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी यह भी सामने आई है कि सेडमैप संस्था को 10% सर्विस चार्ज पर टेंडर जारी किया गया, जबकि स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक सर्विस चार्ज 1 से अधिकतम 10% तक होना चाहिए। ऐसे में शासन को लाखों रुपए की हानि हो रही है और यह बड़ा सवाल खड़ा करता है कि आखिर किसकी शह पर सेडमैप को इतनी छूट मिली

Comments