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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

कुत्ते का अंतिम संस्कार, प्रयागराज में होगा अस्थि विसर्जन,सिर्फ़ पालतू नहीं…परिवार का बेटा था तिलकधारी

ग्राम पिपट में पालतू कुत्ते का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार

छतरपुर। राजनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पिपट से इंसान और जानवर के रिश्ते की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। यहाँ एक पालतू कुत्ते तिलकधारी का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से किया गया। तिलकधारी को उसके मालिक सद्दू पटेरिया ने बेटे की तरह पाला था और अब उसकी मृत्यु के बाद परिवार ने इंसानी संस्कारों के अनुसार विदाई दी है।

जानकारी के अनुसार करीब दस वर्ष पूर्व सद्दू पटेरिया को एक बेसहारा देशी नस्ल की कुतिया सड़क पर मिली थी। सद्दू ने उसे अपने घर में आश्रय दिया और नाम रखा रामकली। कुछ समय बाद रामकली की मृत्यु हो गई, लेकिन उसने अपने पीछे एक नन्हा सा बच्चा छोड़ा। सद्दू ने उस मासूम पिल्ले को भी पालने का संकल्प लिया।

उस पिल्ले का नामकरण बड़े भव्य तरीके से किया गया। ग्राम पंचायत क्षेत्र में चौक समारोह रखा गया, जहाँ बैंड-बाजे के साथ नामकरण हुआ। गाँव के लोग आमंत्रित किए गए, दावत का आयोजन हुआ, और पूरे हर्षोल्लास के साथ पिल्ले का नाम तिलकधारी रखा गया। उस समय यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी थी।

समय बीतने के साथ तिलकधारी पटेरिया परिवार का हिस्सा बन गया। सद्दू पटेरिया ने उसे सिर्फ़ पालतू जानवर नहीं माना, बल्कि अपने बेटे की तरह स्नेह और प्यार दिया। तिलकधारी की देखभाल में किसी तरह की कमी नहीं छोड़ी गई।

अब वही तिलकधारी इस दुनिया को अलविदा कह चुका है। उसकी मौत से पूरा परिवार ग़मगीन है। मालिक सद्दू पटेरिया ने हिंदू रीति-रिवाजों के साथ उसका अंतिम संस्कार किया। खास बात यह है कि सद्दू ने तिलकधारी की अस्थियों को प्रयागराज ले जाकर गंगा में विसर्जित करने का निर्णय लिया है।

गाँव में इस घटना की चर्चा हर किसी की जुबान पर है। लोगों का कहना है कि आज के समय में जहाँ इंसान, इंसान से रिश्ते भूलता जा रहा है, वहीं एक व्यक्ति ने जानवर को अपना परिवार मानकर ऐसी मिसाल पेश की है, जो समाज को सोचने पर मजबूर करती है।

यह घटना सिर्फ़ एक कुत्ते के अंतिम संस्कार की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसानियत, मोहब्बत और अपनापन की सबसे बड़ी तस्वीर है।



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