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मैं खजुराहो मुझे बचाओ - मंदिरों की नगरी में नशे का साया जिम्मेदार बेखबर ?

खजुराहो के वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य द्वार के पास शराब ठेका,चंदेलकालीन शिवसागर तालाब बना शराबियों का अड्डा जिम्मेदार बेखबर  खजुराहो केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और विश्व मंच पर देश की ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। यहां स्थित खजुराहो मंदिर समूह को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त है और हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटक इसकी अद्भुत स्थापत्य कला और इतिहास को देखने पहुंचते हैं। विशेष रूप से वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल खजुराहो का सबसे प्रमुख और सर्वाधिक भ्रमण किया जाने वाला परिसर है। लेकिन इन दिनों जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे खजुराहो की प्रतिष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वेस्टर्न ग्रुप ऑफ टेंपल के मुख्य प्रवेश द्वार के पास संचालित शराब ठेके से शराब खरीदकर कुछ लोग पास स्थित चंदेलकालीन शिवसागर तालाब में बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई दे रहे हैं। तालाब के किनारों पर बिखरी शराब की बोतलें और गंदगी न केवल ऐतिहासिक धरोहर की गरिमा को ठेस पहुंचा रही हैं, बल्कि आने वाले पर्यटकों के सामने भी खजुराहो की नकारात्मक छवि प्रस्तुत कर रही हैं। खजुराहो की प...

समाज की चुप्पी पर भारी पड़ी इंसानियत की गूंज अस्पताल पहुंचा वृद्ध

राहगीरों की बेरुख़ी,मीडिया और पुलिस बनीं सहारा  वृद्ध को मिला इलाज


छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के टोरिया गांव से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। गांव के चौराहे पर कई दिनों से एक अज्ञात वृद्ध बीमार हालत में पेड़ के नीचे पड़ा रहा। शरीर कमजोर था, आंखों में दर्द और लाचारी साफ झलक रही थी। लोग रोज़ गुजरते रहे, कुछ दया दिखाते हुए खाने का सहारा देते रहे, लेकिन इलाज दिलाने की जिम्मेदारी कोई नहीं उठाता।

दिन गुजरते गए और यह वृद्ध वहीं लाचार होकर जिंदगी और मौत से जूझता रहा। तभी मीडिया की नज़र पड़ी, और मामला तुरंत चंद्रनगर चौकी तक पहुंचाया गया। सूचना मिलते ही चौकी से आरक्षक अखिलेश शिवहरे मौके पर पहुंचे और डायल 112 व 108 एंबुलेंस की मदद से इस बेसहारा वृद्ध को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अब उसका इलाज जारी है और उम्मीद की जा रही है कि उसे नई जिंदगी मिल सके।

इस घटना ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या हमारी इंसानियत सिर्फ किसी को खाना खिलाने तक सीमित रह गई है? क्या हम अपने सामने किसी को मौत से जूझते देखते रहेंगे और मदद करने से बचते रहेंगे?

स्थानीय निवासी शेरा यादव ने भी भावुक अपील की है कि – “अगर आपके आसपास कोई बीमार या बेसहारा व्यक्ति सड़क पर पड़े मिले, तो सिर्फ देखकर मत निकल जाएं। उसकी मदद करें, प्रशासन या पुलिस को सूचना दें। सरकार भी यही कहती है कि ज़रूरतमंद की मदद करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।”

यह कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्ची नेकी सिर्फ रोटी देने में नहीं, बल्कि किसी की जान बचाने की पहल करने में है।



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