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केन-बेतवा में मुआवजा या खेल ? सूत्रों के मुताबिक बाहरी लोगों ने भी फर्जी तरीके से लिया मुआवजा क्या अब जांच में होगी वसूली ?

केन-बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा… या फिर “मौका” वितरण ? केन बेतवा लिंक परियोजना में मुआवजा वितरण में विसंगतियों को लेकर चल रहे प्रदर्शन प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थगित कर दिया गया है लेकिन मामले में अब सबकी नजर प्रशासन की जांच में टिकी हुई है  सूत्रों के अनुसार छतरपुर जिले के डूब क्षेत्र के गांवों में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है जिनका हक था,वो लाइन में खड़े रह गए…और जिनका कोई लेना-देना नहीं गांव के भी नहीं ऐसे कई लोगों के खातों में पैसा पहुंच गया ये सिस्टम की गलती है या सेटिंग का कमाल ? पिछले 12 दिन तक ग्रामीण चिता पर लेटे रहे प्रदर्शन किया,तब जाकर फाइलें खुलीं और जांच दल बन गया। सवाल ये है क्या जांच सच सामने लाएगी ? अब सीधे सवाल प्रशासन से क्या फर्जी मुआवजा लेने वालों से वसूली होगी ? क्या मिलीभगत करने वाले पटवारी बच पाएंगे ? और जो असली हकदार हैं…उन्हें उनका हक मिलेगा ? या फिर हमेशा की तरह…मामला उठेगा,सुर्खियां बनेगी,और फिर सब कुछ “ठंडे बस्ते” में चला जाएगा ?

समाज की चुप्पी पर भारी पड़ी इंसानियत की गूंज अस्पताल पहुंचा वृद्ध

राहगीरों की बेरुख़ी,मीडिया और पुलिस बनीं सहारा  वृद्ध को मिला इलाज


छतरपुर जिले के बमीठा थाना क्षेत्र के टोरिया गांव से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। गांव के चौराहे पर कई दिनों से एक अज्ञात वृद्ध बीमार हालत में पेड़ के नीचे पड़ा रहा। शरीर कमजोर था, आंखों में दर्द और लाचारी साफ झलक रही थी। लोग रोज़ गुजरते रहे, कुछ दया दिखाते हुए खाने का सहारा देते रहे, लेकिन इलाज दिलाने की जिम्मेदारी कोई नहीं उठाता।

दिन गुजरते गए और यह वृद्ध वहीं लाचार होकर जिंदगी और मौत से जूझता रहा। तभी मीडिया की नज़र पड़ी, और मामला तुरंत चंद्रनगर चौकी तक पहुंचाया गया। सूचना मिलते ही चौकी से आरक्षक अखिलेश शिवहरे मौके पर पहुंचे और डायल 112 व 108 एंबुलेंस की मदद से इस बेसहारा वृद्ध को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। अब उसका इलाज जारी है और उम्मीद की जा रही है कि उसे नई जिंदगी मिल सके।

इस घटना ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है – क्या हमारी इंसानियत सिर्फ किसी को खाना खिलाने तक सीमित रह गई है? क्या हम अपने सामने किसी को मौत से जूझते देखते रहेंगे और मदद करने से बचते रहेंगे?

स्थानीय निवासी शेरा यादव ने भी भावुक अपील की है कि – “अगर आपके आसपास कोई बीमार या बेसहारा व्यक्ति सड़क पर पड़े मिले, तो सिर्फ देखकर मत निकल जाएं। उसकी मदद करें, प्रशासन या पुलिस को सूचना दें। सरकार भी यही कहती है कि ज़रूरतमंद की मदद करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।”

यह कहानी हमें याद दिलाती है कि सच्ची नेकी सिर्फ रोटी देने में नहीं, बल्कि किसी की जान बचाने की पहल करने में है।



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