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क्या मेंढकों की आवाज़ सुनाने के लिए काटी जा रही है बिजली ?

टर्र-टर्र के बीच अंधेरे में जनता,आखिर बिजली विभाग कब जागेगा ? समीर अवस्थी बरसात का मौसम आते ही गांव-गांव में मेंढकों की टर्र-टर्र सुनाई देने लगी है। कहीं लोक परंपरा के तहत मेंढक-मेंढकी का विवाह कराया जा रहा है, तो कहीं अच्छी बारिश की कामना में लोग पूजा-पाठ कर रहे हैं। आस्था और परंपरा भारतीय संस्कृति का हिस्सा हैं, उनका सम्मान होना चाहिए। लेकिन इन सबके बीच एक और परंपरा ऐसी है जो हर साल निभाई जाती है अघोषित बिजली कटौती छतरपुर के बमीठा क्षेत्र में बिजली गायब है क्षेत्र के कई  गांव अंधेरे में डूबा हुआ है। लोग मज़ाक में कह रहे हैं कि शायद बिजली विभाग ने भी सोचा होगा कि जब मेंढकों की बारात निकल रही है तो लाइट बंद कर दो,ताकि जनता प्रकृति का संगीत पूरे सुकून से सुन सके। यह लेख भले ही हंसी पैदा करे,लेकिन इसके पीछे जनता की गहरी पीड़ा छिपी है आखिर सवाल यह है कि जब आधुनिक भारत,डिजिटल इंडिया और स्मार्ट व्यवस्था की बातें हो रही हैं,तब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों अघोषित बिजली कटौती क्यों? यदि लाइन में तकनीकी खराबी है तो उसकी सूचना क्यों नहीं? यदि रखरखाव का कार्य है तो उसका समय पहले से...

छतरपुर जिले में धूमधाम से मनाया गया ईद-ए-मिलाद-उन-नबी,हिंदू-मुस्लिम बने भाईचारे का प्रतीक

छतरपुर जिले में धूमधाम से मनाया गया जश्न-ए-ईद मिलाद-उन-नबी

छतरपुर। जिलेभर में जश्न-ए-ईद मिलाद-उन-नबी का पर्व शुक्रवार को बड़ी धूमधाम और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया गया। मस्जिदों को सजाया गया, जुलूस और जलसे निकाले गए तथा मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को याद किया गया।

इसी क्रम में बमीठा कस्बे में भी विशाल जलसा निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए और अमन, भाईचारे तथा इंसानियत का पैगाम दिया। खास बात यह रही कि जलसे में हिंदू समाज के लोग भी सम्मिलित हुए और आपसी एकता की मिसाल पेश की।

जलसे के दौरान जगह-जगह तबर्रुक का वितरण किया गया। इस अवसर पर बमीठा सरपंच प्रतिनिधि प्रवीण जैन ने जलसे का स्वागत कर लोगों को गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे का संदेश दिया


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