छतरपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की खुली पोल स्वीपर लगाते इंजेक्शन,सरकार के दावों पर उठे सवाल ?
छतरपुर : मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन छतरपुर जिले से आई तस्वीरें उन दावों पर सीधा सवाल खड़ा करती हैं। चंद्रनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की वास्तविक स्थिति ने जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डॉक्टर दशरथ पटेल का बड़ा खुलासा
चंद्रनगर स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर दशरथ पटेल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल में स्वीपर तक को मरीजों को इंजेक्शन लगाने का काम सौंपा जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरी लापरवाही को संरक्षण स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉक्टर भावना सोनी देती हैं।
डॉ. दशरथ पटेल का कहना है कि चंद्रनगर स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों का सही इलाज नहीं किया जाता प्रभारी डॉक्टर भावना सोनी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया मरीजों को स्वीपर इंजेक्शन लगाता है बाहर की मेडिकल दुकानों से दवाई खरीदने पर मजबूर किया जाता है। यही नहीं, यहाँ पर स्वीपर इंजेक्शन लगाते हैं और इस पर प्रभारी डॉक्टर भावना सोनी पर्दा डालती हैं।
प्रभारी डॉक्टर का चौंकाने वाला बयान पूर्व में भी हो चुका वायरल
आपको बता दें यह पहला मामला नहीं है पूर्व में भी स्वीपर द्वारा मरीजों को ड्रिप और इंजेक्शन लगाते वीडियो वायरल हुआ था जिस पर जब प्रभारी डॉक्टर भावना सोनी से सवाल पूछा गया तो उनका बयान और भी हैरान करने वाला था। उन्होंने कहा स्वीपर इंजेक्शन लगाते हैं, जिला अस्पताल में जाकर भी देख लीजिए।
उनका यह बयान साफ दर्शाता है कि विभाग में लापरवाही किस हद तक है और जिम्मेदार अधिकारी भी इसे गंभीरता से नहीं लेते।
जनता की बेबसी और गुस्सा अब दिन प्रतिदिन बढ़ने लगी है
इलाज कराने पहुँचे मरीज और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में सही इलाज न मिलने की वजह से उन्हें निजी दवाखानों और मेडिकल दुकानों का सहारा लेना पड़ता है। गरीब तबके के लोगों को तो दवाइयों और इलाज के लिए कर्ज तक लेना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि सरकार बार-बार आयुष्मान भारत” और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर न तो डॉक्टर मौजूद रहते हैं और न ही दवाइयाँ। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सरकार की योजनाएँ किसके लिए हैं ?
सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
छतरपुर जिले की यह स्थिति प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य दावों की पोल खोल रही है। वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है क्योंकि इतनी गंभीर लापरवाही के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
अब जनता सवाल पूछ रही है....
1 क्या मरीजों की जान इतनी सस्ती है कि अस्पतालों में स्वीपर इंजेक्शन लगाएँ ?
2 क्या सरकार के दावे सिर्फ चुनावी भाषण और विज्ञापनों तक ही सीमित हैं ?
3 जब जिला मुख्यालय और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की यह स्थिति है, तो गाँव-कस्बों की हालत कैसी होगी ?
यह मामला सिर्फ एक स्वास्थ्य केंद्र का नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की हकीकत है। छतरपुर की यह तस्वीर बताती है कि सरकार की लापरवाही और विभागीय भ्रष्टाचार की कीमत आम जनता को अपनी जान से चुकानी पड़ रही है।
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